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च्मुझे शायरी से इश्क हैज् यह भावना मुझे १५ साल की उम्र से संवार रही है

6 वर्ष पहले
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भोपाल।‘मैं आठवीं में था। तब से मुझे शायरी से इश्क हुआ। उन दिनों गर्मी की छुटिट्यों में या तो हम खेलते थे या फिर रेडियो सुनते थे। मैं रेडियो ज्यादा सुनता था। तब गीत-गजलों की पेशकश काफी हुआ करती थी। यहीं से शायरी के लिए मेरा इश्क और बढ़ा। ’यह कहना है मशहूर शायर इरशाद कामिल का।
वे शनिवार को भोपाल आए। यहां उनकी नई कृति ‘एक महीना नज्मों का’ का लोकार्पण हुआ। वे स्पंदन संस्था के कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने दैनिक भास्कर डॉट काम से विशेष बातचीत की।

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