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जॉर्ज गास्ते

6 वर्ष पहले
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भोपाल। 20वीं शताब्दी में भारतीयों का रहन-सहन और गुलामी के दौर में उनकी दिनचर्या आपको फ्रांस के महान कलाकार जॉर्ज गास्ते द्वारा खींची गईं तस्वीरों में देखने को मिलेंगी। पेशे से पेंटर गास्ते ने यह तस्वीरें 1905 से 1910 के दौरान ली थीं। 34 फोटो की यह प्रदर्शनी यहां स्वराज भवन में लगाई गई है। इसे फ्रेंच एंबेसी की मदद से 'अालियांस फ्रांसिस द भोपाल' संस्था ने आयोजित किया है। प्रदर्शनी 12 फरवरी तक चलेगी।
प्रदर्शनी में पहुंचे संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव ने इन तस्वीरों को एक एेतिहासिक दस्तावेज बताया। यह प्रदर्शनी जॉर्ज गास्ते की याद में लगाई गई है।
पेंटिग और फोटो में देखिए तब का ताजमहल
जॉर्ज गास्ते मुख्य रूप से पेंटर थे। उन्होंने भारत में ग्वालियर, बनारस, मदुरई और आगरा जैसी जगहों पर घूमकर पेंटिंग्स बनाईं। उन्होंने ताजमहल की खूबसूरती को कैनवास पर उकेरा। उस दौर में बनाई पेंटिंग इतनी खूबसूरत हैं कि कई बार यह फोटोग्राफ की तरह नजर आती है।

भारत के होकर रह गए पेंटर
अपनी जंदगी के कई वर्ष अलजीरिया और इजिप्ट में बिताने के बाद जॉर्ज गास्ते पांच साल के लिए भारत आए थे। वे सबसे पहले आगरा में यमुना किनारे आकर रहे। भारत से उन्हें बहुत प्यार था और इन पांच सालों में उन्होंने यहां कई पेंटिंग्स बनाईं। 1908 में वेनिस से लौटकर उन्होंने दक्षिण भारत का रुख किया और मदुरई पहुंचे। यहां उन्होंने स्टूडियो खोला और कुछ स्टूडेंट्स को पेंटिंग्स भी सिखाईं। नहाते हुए भारतीय ब्राह्मण पर बनाई गई उनकी पैंटिंग को फ्रांस में खूब सराहा गया। महज 41 साल की उम्र में 12 सितंबर 1910 में मदुरई के स्टूडियो में उनका निधन हो गया था।
अगली स्लाइड में देखें, जॉर्ज गास्ते के कैमरे से ली गईं गुलाम भारत की कुछ तस्वीरें...