भोपाल। दुनिया में सिर्फ भारतीय संस्कृति ही ऐसी है जो बहुत सोच-विचार कर और वैज्ञानिक तरीके से बनाई गई है। यह भारतीय संस्कृति की
खूबसूरती ही है कि 5 लोगो के घर में पांचों लोगों को अलग-अलग भगवान की पूजा करने की आजादी होती है और यदि 33 करोड़ भगवान में से उसे कोई पसंद नहीं आता तो वह नया भगवान बना सकता है। यही ऐसी संस्कृति है जहां हर कोई अपने हिसाब से रह सकता है।
प्रेम किसी का नहीं होता, सब प्रेम में होते हैं। मैं तुमसे प्रेम करता हूं, यह नकली स्टेटमेंट है। यह बात ईशा फाउंडेशन के फांउडर जग्गी महाराज 'सदगुरू' ने कही। वे दैनिक भास्कर की ओर से आयोजित फिल्म डायरेक्टर कुणाल कोहली के साथ लाइव डिस्कशन में बोल रहे थे। कुणाल कोहली ने अपने जीवन के बारे में भी सदगुरु से खुलकर बातचीत की। प्रस्तुत है कुणाल कोहली और सदगुरु के बीच बातचीत के महत्वपूर्ण अंश-
प्रश्न : मेरे और पापा के बीच कभी भावनात्मक संबंध नहीं रहा। पापा बीमार हुए फिर भी मुझे कुछ महसूस नहीं हुआ? क्या मैं बुरा आदमी बन रहा हूं? क्या मैं स्वार्थी बन रहा हूं?
सदगुरु : सब कुछ स्वार्थी है। आपकी भावना आापके अंदर से आ रही है तो स्वार्थी होगी ही। यह निर्भर करता है कि आपकी भावना कंजूस है या उदार। कंजूस को कम-जूस समझिये। आपके अंदर इतना जूस ही नहीं है कि सृष्टि के प्रति भावना रख सकें। पैसों से आप दाे लोगों का ध्यान रख सकते हैं लेकिन बिना पैसे के कई लोगों के प्रति अच्छी भावना रखी जा सकती है।
प्रश्न : ऐसा कैसे हो सकता है, हम सब के अंदर इतना प्रेम तो रहता ही है?
सदगुरु : मैं शारीरिक या भौतिक चीजों की बात नहीं कर रहा हूं। किसी व्यक्ति को प्रेम करने से आपका पैसा नहीं लगेगा लेकिन आपका जीवन सुंदर हो जाएगा।
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