राज्य सरकार और स्वयंसेवी संगठनों को इस दिशा में ठोस पहल करनी होगी। यह बात उन्होंने रविवार को दैनिक भास्कर संवाददाता से चर्चा में कही। वे यहां गायत्री मंदिर में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होने आए थे। अपने तीन दिवसीय प्रवास के बाद वे शाम को हरिद्वार रवाना हो गए।
डॉ. पंड्या ने कहा कि स्वच्छता हमारी जीवन शैली का हिस्सा होना चाहिए। जिस तरह हम नियमित रूप से अपने शरीर की सफाई करते हैं, उसी तरह शहर की सफाई में भी किसी तरह की शहर की सफाई का जिम्मा लेना भी प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। दैनिक भास्कर ने स्वच्छता अभियान प्रारंभ कर नगर निगम चुनाव के समय जन प्रतिनिधियों से शहर को गंदगी से मुक्त कराने का जो संकल्प दिलाया है, वह सराहनीय है।
उन्होंने बताया कि गायत्री परिवार द्वारा गंगा की सफाई का अभियान शुरू किया गया है। हरिद्वार से जिन शहरों से गंगा होकर गुजरी है, वहां गायत्री परिवार के लोग गंगा को मैली होने से बचा रहे हैं। करीब ढाई हजार किलोमीटर क्षेत्र में गंगा को साफ करने का एक बड़ा प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इसमें पांच-पांच सौ किमी की दूरी पर फैस बना कर काम किया जा रहा है। इस अभियान के तहत गंगा के दोनों किनारों के बीस-बीस किमी क्षेत्र में हरियाली और टायलेट बनाए जाने की योजना भी है। उन्होंने कहा कि परिवार के कार्यकर्ताओं की टीमें गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए जागरूकता अभियान भी चला रही हैं।
दस साल में कर देंगे गंगा को साफ
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 तक गंगा को पूरी तरह साफ करने की योजना है। इसके लिए प्रधान मंत्री
नरेंद्र मोदी व कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी चर्चा की है। सरकार के प्रयासों को सुप्रीम कोर्ट ने नाकाफी बताया है, जो चिंता का विषय है। डा. पंड्या ने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा के साथ ही गौ रक्षा व उसके संरक्षण पर भी गंभीरता से ध्यान देना होगा। किसी भी चीज को रोकने के लिए कानून बनाने में देरी लगती है। कानूनी अड़चनें भी होती हैं, उससे बेहतर है कि हम सफाई और गौ गौ हत्या रोकने के लिए लोगों को जागरूक करें।
कुछ संगठनों द्वारा भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग के जवाब में उन्होंने कहा कि भारत अब केवल हिंदू राष्ट्र नहीं बन सकता। इस देश का बंटवारा ही धर्म व जाति के नाम पर हुआ था। अब हमें यह चाहिए कि सभी धर्मों के लोग मिलजुल कर एकता व सद्भाव से रहें। गांवों में अभी भी सभी लोगों के बीच आपसी भाईचारा दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि राजनीति दलदल है। संतों को इससे दूर रहना चाहिए। जो संत राजनीति में जाकर धर्म को लेकर अनर्गल बातें करते हैं, उससे धर्म की हानि होती है। कई संतों के जेल में होने के सवा पर वे बोले की लोगों को स्वयं अच्छे-बुरे की पहचान करनी होगी। मीडिया को भी चाहिए कि ऐसे लोगों को वो प्रचारित न करें। किसी संत का फिल्म में काम करना या गाने गाए। इसका समाज में अच्छा असर नहीं पड़ेगा। स्वाइन फ्लू समेत अन्य बीमारियों पर काबू पाने के लिए उन्होंने कहा कि इसमें यज्ञ चिकित्सा भी कारगर हो सकती है। गायत्री मंत्र और अन्य मंत्रों के जाप व यज्ञ के माध्यम से शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है। अध्यात्म भी एक विज्ञान है।
डॉ. पंड्या यहां तीन दिवसीय प्रवास के बाद रविवार शाम हरिद्वार के लिए रवाना हो गए। इस दौरान उन्होंने यहां मंडीदीप क्षेत्र के ग्राम इमलिया में आयोजित गौ संरक्षण कार्यशाला को संबोधित किया। गायत्री शक्तिपीठ एमपी नगर में आयोजित कार्यक्रमों में भी शामिल हुए। उनके दर्शन व आशीर्वाद पाने के लिए भत्तों की शक्तिपीठ में कतारें लगी थीं।