भोपाल। हाल ही में लखनऊ में हुए पांचवें नेशनल साइंस फिल्म फेस्टिवल में शहर के यंग फिल्म डायरेक्टर मुजीब कुरैशी की डाक्यूमेंट्री फिल्म 'विसर्जन' को काफी सराहना मिली। मुजीब की फिल्म को फिल्म डायरेक्टर डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने प्रोत्साहित किया।
यह फिल्म प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनने वाली मूर्तियां और उसके विसर्जन के बाद पर्यावरण पर होने वाले दुष्परिणामों पर आधारित है। हथाईखेड़ा डेम के आसपास ईको सिस्टम और मानवों के रीति रिवाजों का उस पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन इस फिल्म में किया गया है। 11 मिनट की इस फिल्म को यूजीसी के नेशनल लेवल के प्रकृति फिल्म फेस्टिवल में भी काफी सराहना मिली थी।
गौरतलब है कि साइंस और एनवायर्नमेंट पर बेस्ड फिल्म फेस्टिवल में देशभर से चुनिंदा फिल्मों की स्क्रीनिंग की गई। मुजीब मध्यप्रदेश से इकलौते फिल्म डायरेक्टर रहे। जिनकी फिल्म की स्क्रीनिंग हुई। मुजीब ने एसवी पॉलीटेक्नीक से फिल्म एंड टेलीविजन प्रोडक्शन में डिप्लोमा किया। सिनेमेटोग्राफर लेक्चरर आशीष भवालकर के मार्गदर्शन में अपनी प्रतिभा को उभारा। मुजीब ने इससे पहले कबाड़ से जुगाड़ और बेस्ट फिल्म का नेशनल अवार्ड जीतने वाली गणेश जी का रोजा में असिस्टेंट डायरेक्टर की भूमिका निभाई।
फिल्म विसर्जन के बारे में
- -मुजीब ने यह फिल्म सिल्वर पिक्सल एजुकेशन मल्टीमीडिया डेवलपमेंट सोसायटी के बैनर तले बनाई।
- डॉक्युमेंट्री फिल्म की अवधि-11 मिनट
- -डायरेक्टर मुजीब कुरैशी
- स्क्रिप्ट राइटर, प्रोड्यूसर-आशीष भवालकर
आगे क्या है योजना
मुजीब का मानना है कि पर्यावरण के मुद्दे लोकल होने के साथ साथ ग्लोबल भी हैं। इसलिए मैं इन्हीं मुद्दों को अपनी फिल्मों के जरिए समाज के सामने लाने का प्रयास कर रहा हूं।