भोपाल। राजधानी की पुरानी तंग गलियों में एक ऐसा शख्स है जो आपकाे हैरान कर देगा। ये हैं रियाजुद्दीन उर्फ मुन्ने भाई। चालीस साल पहले आंखों की रोशनी गंवा चुके हैं। लेकिन इनके पास एक ऐसा हुनर है, जिसने इस कमजोरी को कहीं पीछे छोड़ दिया है। देख नहीं पाने के बावजूद बुलेट और अन्य वाहनों को सुधारना मुन्ने भाई के बाएं हाथ का खेल है। मुन्ने भाई गाड़ी की आवाज सुनकर उसका मर्ज जान जाते हैं और उसे ठीक भी कर देते हैं। उनके इस हुनर के चर्चे देश भर में है और रांची,
कोलकाता से लोग उनके पास अपनी बुलेट सुधरवाने आते हैं।
स्कूल की बजाय मैकेनिक के गैरेज में जाते थे
रियाजुद्दीन बताते हैं, 'बचपन से मुझे बुलेट और गाड़ी सुधारने का शौक था। मुझे बचपन में ही गाड़ी के पार्ट्स से प्यार हो गया था। स्कूल जाने के लिए घर से निकलता था लेकिन मैकेनिक की दुकान पर जाकर खड़ा हो जाता था। आठवीं में फेल होने के बाद पढ़ाई छोड़ी और इसी काम में लग गया। यूं तो सभी गाड़ी सुधार लेता हूं लेकिन बुलेट का एक्सपर्ट हूं। 1972 में अचानक मेरी आंखें चली गईं लेकिन गाड़ियों से प्यार कम नहीं हुआ। इतना तजुर्बा हो गया था कि गाड़ी की आवाज सुनकर उसकी गड़बड़ी पहचान सकता था तो यह काम जारी रखा। पाने-पेचकस देने में भतीजा और बेटी मदद कर देती है, गाड़ी खुद सुधारता हूं।'
आखिर वो कौन सी कला है, जिसके बूते वे आवाज सुनकर गाड़ी सुधार देते हैं? इस सवाल पर मुन्ने भाई कहते हैं कि यह सिर्फ तजुर्बा है। इसके अलावा कुछ और नहीं। मुन्ने के पांच बेटे-बेटी हैं। मुन्ने भाई का दावा है कि वे यदि किसी गाड़ी को सुधारते हैं तो दस गाड़ियों की अावाज के बीच भी उनकी सुधारी गाड़ी की आवाज पहचान सकते हैं।
रात में करते हैं काम
मुन्ने बताते हैं, 'मैं दिन में कम ही काम करता हूं। अपनी दुकान के पीछे एक वर्कशॉप में रात में चार बजे तक काम करता हूं और वहीं पलंग पर सो जाता हूं। अभी रांची के एक डॉक्टर की बुलेट बना रहा हूं। जो काफी पुरानी हो गई थी उसे नया लुक दे रहा हूं।'
'मेरी कब्र पर दो पाने रख देना'
मुन्ने बताते हैं, 'मुझे आटो पार्ट्स से बहुत प्यार है। मैंने अपने बच्चों से कह रखा है कि जब भी मेरी मौत हो, मेरी कब्र में मेरे साथ दो पाने भी रख देना। मेरे पास एक
मारुति 800 भी है। उसे भी दिलोजान से प्यार करता हूं। बच्चों को कह दिया है कि मेरे मरने के बाद भी इसे बेचना मत। यदि कार से कोई परेशानी हो तो मेरी कब्र पर लाकर खड़ी कर देना।'
रोज खाते हैं आधा किलो दही
मुन्ने भाई बताते हैं, 'मुझे डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर है। इसलिए पिछले 20 सालों से रोज आधा किलो दही खाता हूं। ये मेरी डाइट में शामिल है।'
अगली स्लाइड में देखिये, बुलेट सुधारते हुए कुछ तस्वीरें...