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स्ङ्खढ्ढहृश्व स्नरुश्व: कृष्ण-नरोत्तम निरुत्तर, तो शिव उतरे मैदान में

6 वर्ष पहले
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भोपाल। स्वाइन फ्लू के संक्रमण को रोक पाने में स्वास्थ्य विभाग के नाकाम रहने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अब स्वयं मैदान में उतर आए हैं। बुधवार को मुख्यमंत्री ने जेपी और हमीदिया अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान उनके तेवर गर्म थे।
उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा और प्रमुख सचिव प्रवीर कृष्ण को कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि, वे बयानबाजी से बाज आएं और हकीकत से उन्हें अवगत कराएं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि, अस्पतालों में इलाज के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। आगे जो भी जरूरत पड़ेगी, उसे भी हम पूरा करेंगे। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग से स्वाइन फ्लू से अब तक हुई मौतों, मरीजों और उपचार को लेकर किए जा रहे उपायों की रिपोर्ट भी मांगी है।
स्वास्थ्य मंत्री ने माना
शहर में स्वाइन फ्लू के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पतालों में मरीजों को भर्ती कराया जाएगा। इसके लिए भोपाल के आधा दर्जन से ज्यादा अस्पतालों को स्वाइन फ्लू पेशेंट ट्रीटमेंट के लिए मान्यता दे रहे हैं। यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बुधवार को जेपी और हमीदिया अस्पताल के निरीक्षण के बाद मीडिया के चर्चा के दौरान दी। मिश्रा ने बताया कि प्रदेश में स्वाइन फ्लू से सिर्फ 44 मरीजों की जान गई है। इसके अलावा सरकारी और निजी अस्पतालों में अब भी 66 पॉजिटिव मरीज भर्ती है, जिनका इलाज किया जा रहा है।
यह भी जानें...
पूरे देश में अभी स्वाइन फ्लू को लेकर हड़कंप मचा हुआ है। देशभर में फ्लू के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसका एक कारण हमसे हो गलतियां भी हैं। हम खुद को थोड़ा जागरूक कर लें तो शायद इसस बच सकते हैं। हम आमतौर पर सर्दी खांसी को बहुत सामान्य बीमारी मानते हैं। लेकिन, शायद आपको यह जानकारी हैरान कर सकती है कि सामान्य दिखने वाली सर्दी खांसी भी स्वाइन फ़्लू का कारण बन सकती है।

इन लक्षणों को न करें नज़रंदाज
मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमवाय अस्पताल के प्रभारी डीन डॉ. संजय दीक्षित बताते हैं कि यदि किसी व्यक्ति को सर्दी-खांसी है और उसके साथ उसे सांस लेने में भी तकलीफ हो रही है या 101 डिग्री से ज़्यादा का बुखार है, तो इसे बिलकुल नज़रंदाज नहीं करना चाहिए। क्योंकि ये लक्षण स्वाइन फ़्लू के हो सकते हैं।

सांस लेने में हो तकलीफ तो कराए जांच
उनके मुताबिक़ हर बार सर्दी-खांसी स्वाइन फ़्लू का संकेत नहीं देती, फिर भी सर्दी-खांसी होने पर अतिरिक्त सावधानी रखना बेहद ज़रूरी है। क्योंकि उसके साथ यदि सांस लेने में तकलीफ होने लगे या तेज़ बुखार आ जाए तो तुरंत किसी अस्पताल में जाकर जांच कराना चाहिए, क्योंकि ज़्यादातर मामलों में ऐसी स्थिति स्वाइन फ़्लू का संकेत देती है और इसका का इलाज जितनी जल्दी शुरू किया जाए इससे बचने की संभावनाएं उतनी ज़्यादा बढ़ जाती हैं। ऐसी स्थिति में आराम करने के साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए, ताकि डी-हाइड्रेशन ना हो। वर्ना मर्ज बढ़ सकता है।
ऐसे बचें स्वाइन फ्लू से
स्वाइन फ़्लू का वायरस एच 1 एन 1 सही मायनों में एचआईवी से भी ज़्यादा घातक है, क्योंकि एचआईवी से पीड़ित होने पर किसी इंसान की तुरंत मौत नहीं होती। लेकिन तत्काल उचित उपचार ना मिलने पर सेकंड स्टेज का स्वाइन फ़्लू एक हफ्ते में पीड़ित व्यक्ति को अपना शिकार बना लेता है। दूसरा एचआईवी सिर्फ चार कारणों से होता है, जिन्हें समझकर उससे बचा जा सकता है। लेकिन स्वाइन फ़्लू वायरस हवा में तैरता है, उससे बचने के लिए अतिरिक्त सावधानी की ज़रूरत है।
ऐसे बचें
  • जहां तक हो, भीड़ से बचकर रहें।
  • सेनेटाइजर का उपयोग करना बेहतर होगा।
  • ज्यादा लोगों से मिल रहे हैं तो थोड़ी-थोड़ी देर में हाथ जरूर धोएं।
  • घर में किसी को सर्दी-खांसी-जुकाम हो तो उसे अलग रखें और खांसते समय मुंह पर रूमाल जरूर रखें।
आयुर्वेद देता है बचने के नुस्खे
आयुर्वेदिक चिकित्सक ड़ॉ लोकेश जोशी के मुताबिक़ तुलसी के पत्ते, कपूर और इलायची का उपयोग स्वाइन फ़्लू के वायरस से उनके अनुसार। इन तीनों को समान मात्रा में लेकर पीस कर एक छोटी पुड़िया बनाकर अपने साथ रख लेना चाहिए। समय-समय पर इसकी खूशबू सूंघने से शरीर में इस वायरस का मुकाबला करने की शक्ति बढ़ जाती है।
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