भोपाल। बैरसिया थाने में बुधवार को एक हवलदार ने स्वयं को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। पुलिस का कहना है कि हवलदार बीमारी से परेशान था और इस कारण उसने खुदकुशी है। ऐसे ही कुछ अन्य कारण दैनिक भास्कर डॉट काम आपको बता रहा है, जिसके चलते पुलिसकर्मी डिप्रेशन और स्ट्रेस में रहते हैं।
पिछले माह जनवरी में टीकमगढ़ के पृथ्वीपुर में टीआई प्रमोद चतुर्वेदी ने अपने अफसर एसडीओपी केएस मलिक को गोली मार दी थी। मप्र पुलिस महकमे में इस घटना से हलचल मच गई थी। अनुशासन और देशसेवा से जुड़े इस संगठन में इस तरह की घटना ये इशारा कर रही है कि सबकुछ ठीक नहीं है।
घटना से ये सामने आ रहा है कि मप्र की पुलिस इस समय तनाव में काम कर रही है। ड्यूटी के तनाव के बाद घर में भी उन्हें तनाव झेलना पड़ता है। पुलिसकर्मी किस-किस तरह के तनाव को झेल रहे हैं, उन्हें क्या परेशानी आ रही है, जानने के लिए पढ़ें ये खबर...।
- ये है पुलिसकर्मियों के स्ट्रेस के प्रमुख कारण
इन कारणों से रहता है तनाव
थानों की बीट प्रणाली सिपाही और हवलदार के लिए तनाव के कराण कई सारे हैं। इनमें यदि किसी सिपाही की ड्यूटी सुबह 6 बजे से 10 तक है, तो उसकी उसी दिन रात 12 से 6 बजे तक ड्यूटी रहती है। उसके बाद फिर शाम 6 से 12 बजे तक और फिर सुबह 10 से 6 बजे तक ड्यूटी रहती है। ऐसे में एक दिन में 2 बार ड्यूटी पर जाना होता है।
ड्यूटी ऑवर ज्यादा होने से बढ़ रहा तनाव
शहर के मनोरोग चिकित्सक डॉ आरएन साहू के मुताबिक, ड्यूटी ऑवर ज्यादा होने से पुलिसकर्मियों में डिप्रेशन, एग्रेसिवनेस, फ्रस्टेशन, नैतिक मूल्यों का पतन, संवेदनशीलता में कमी और गंभीर मानिसक रोग साईकोसिस हो जाता है। बच्चों, माता-पिता, पत्नी के साथ एडजस्टमेंट प्रॉब्लम हो जाती है।
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