भोपाल. राजधानी के बहुचर्चित डॉ. जयश्री नामदेव हत्याकांड मामले में आरोपी अनुराग उर्फ गगन नामदेव (30 वर्ष) को अदालत ने आजीवन कारावास और पांच हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। अनुराग ने 8 मई, 2014 को लालघाटी के पास सुंदरवन कोहिनूर मैरिज गार्डन में शादी समारोह के वक्त स्टेज पर चढ़कर दुल्हन डॉ. जयश्री को गोली मार दी थी। आरोपी जयश्री से एकतरफा प्यार करता था। बुधवार को सत्र न्यायाधीश सुषमा खोसला की कोर्ट ने अनुराग को सजा सुनाई। इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया।
डॉ. जयश्री नामदेव गांधी मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विभाग में पदस्थ थीं। गत 8 मई को जयश्री की शादी इसी कॉलेज से सर्जरी में पीजी कर रहे डॉ. रोहित नामदेव से हो रही थी। वरमाला की रस्म के बाद लोग स्टेज पर दूल्हा-दुल्हन को बधाई देने पहुंच रहे थे। तभी, रात लगभग 11:15 बजे अचानक अनुराग ने स्टेज पर पहुंचकर जयश्री को गोली मार दी थी। इसके बाद उसने दूसरा फायर दूल्हे रोहित पर करना चाहा तो उसने उसे धक्का दे दिया, जिससे गोली स्टेज पर खड़े कचरू सिसोदिया को जा लगी। मौजूद लोगों ने अनुराग को पकड़ लिया और उसकी जमकर पिटाई की। घायल जयश्री को तत्काल लालघाटी चौराहा स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। लोगों ने पिटाई के बाद अनुराग को पुलिस के हवाले कर दिया था।
पता नहीं था कि वह ऐसा करेगाजयश्री के पिता घनश्याम ने अपने बयान में कहा था कि उन्हें पता नहीं था कि अनुराग उनकी बेटी के साथ ऐसा करेगा। डॉ. जयश्री व डॉ. रोहित की सगाई के बाद जब
फेसबुक पर इसके फोटो शेयर किए गए तो उन्हें अनुराग के एकतरफा प्यार की बात पता चली थी। अनुराग, जयश्री की बुआ का लड़का है।
उस दिन क्या हुआ था, डॉ. रोहित की जुबानी...
‘हमारा फोटो सेशन खत्म हो चुका था। हत्यारा मुंह पर सफेद कपड़ा लपेटे स्टेज पर आया। उसकी सिर्फ एक आंख दिख रही थी। मैं कुछ समझ पाता इससे पहले ही वह जयश्री की ओर से मंच पर चढ़ा, उसने हाथ उठाया और फायर कर दिए। इसके बाद वह मुझे मारने के लिए मुड़ा तो मैंने उसे धक्का देकर गिरा दिया। लहुलुहान जयश्री को हम अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन वह नहीं बच सकी।’
मैं उसे बेहद प्यार करता था...
गिरफ्तारी के बाद पुलिस को दिए बयान में अनुराग ने कहा था कि वह जयश्री से बेहद प्यार करता था। वह उसे किसी और के गले में वरमाला डालते कैसे देख सकता था? अनुराग ने एक दिन पहले ही जयश्री को मारने का इरादा कर लिया था।
अदालत ने फैसले में कहा-
आरोपी द्वारा किया गया अपराध विरलतम अपराध की श्रेणी के तहत नहीं आता है। अत: उसे मृत्युदंड से दंडित किया जाना उचित न मानते हुए आरोपी को धारा 302 के तहत आजीवन कारावास व 5000 रुपए अर्थदंड और धारा 307 के तहत पांच साल की जेल और दो हजार जुर्माना, आयुध अधिनियम की धारा 25 के तहत पिस्टल रखने के मामले में तीन साल की जेल, तीन हजार जुर्माना और आयुध अधिनियम की धारा 27 के तहत पांच साल की जेल और पांच हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया जाता है।
उसे जिंदा रहने का हक नहीं : घनश्याम
इस फैसले से हम संतुष्ट नहीं हैं। बुधवार को अदालत के फैसले के बाद वो मेरे भतीजे शिवा को धमकाते हुए गया। कहता है आकर देखता हूं। हम हाईकोर्ट में उसे फांसी देने की अपील करेंगे।'
घनश्याम नामदेव, जयश्री के पिता
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