भोपाल। एमपी पुलिस जल्द पेपरलेस होगी। पुलिस की सभी व्यवस्थाओं को कंप्यूटराइज्ड करने काम तेजी से चल रहा है। पेपरलेस व्यवस्था के शुरू होने से पुलिस विभाग को सालाना 8 करोड़ की बड़ी बचत भी होगी। वैसे, तो मध्य प्रदेश पुलिस सालभर में विभाग से जुड़े कामकाजों के लिए करीब 8 करोड़ रुपए खर्च करती है।
इतनी बड़ी रकम से पुलिस समय-समय पर स्टेशनरी और कागज खरीदती है। लेकिन ऑनलाइन व्यवस्था के जरिए पुलिस सालभर में 8 करोड़ रुपए बचा सकेगी। ईआरपी यानि इंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग सिस्टम के तहत पुलिस मुख्यालय के दस साल के रिकॉर्ड को कंप्यूटराइज्ड किया जा रहा है।
थानों में बैठकर होगा ऑनलाइन काम
अभी तक ऑनलाइन व्यवस्था के तहत प्रदेश के शहरी थानों में ऑनलाइन एफआईआर दर्ज की जाती थी। लेकिन अब ईआरपी सिस्टम से प्रदेश के एक हजार आठ थानों को भी जोड़ा जा रहा है। पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों को पर्सनल लॉगिंग और पासवर्ड दिया जाएगा। इसी लॉगिंग के जरिए पुलिस के तमाम काम ऑनलाइन किए जा सकेंगे। प्रदेश के 11 पुलिस रेंज, तमाम विभाग, शाखाएं और थानों के अधिकांश कामकाज को ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ा जा रहा है।
पेपरलेस होगी मध्य प्रदेश पुलिस, सभी रिकॉर्ड ऑनलाइन करने का काम तेजी से शुरू, चंद मिनटों में होंगे काम
पुलिस की आंतरिक व्यवस्थाओं से ही कामकाज में देरी होती है। पुलिस अधिकारियों को छुट्टियां, पदोन्नति, भविष्य निधि में जमा रकम और विभागीय जांच की सूरत में मौजूदा जानकारी हासिल करने में खासी दिक्कत आती थी। साथ ही जनता से जुड़ी सेवाओं में भी पुलिस थानों के चक्कर काटने पड़ते थे।
पीएम रिपोर्ट हो या फिर वेरिफिकेशन, सभी मामलों में आम जनता को लंबी कागजी कार्रवाई से होकर गुजरना पड़ता था। लेकिन अब नए सिस्टम के लागू होने से पुलिस के काम में देरी नहीं होगी। पुलिस से जुड़े तमाम काम चंद मिनटों में हो जाएंगे। साल के अंत तक नए सिस्टम के शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।