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बीडीएस गड़बड़ी : १२ छात्र तीन और २७ दो साल के लिए परीक्षा से वंचित

6 वर्ष पहले
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भोपाल। बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी की बीडीएस परीक्षा में हुई गड़बड़ी में जांच के दायर में आए 136 में से 97 छात्र अपनी जिम्मेदारी पर आगामी परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। जबकि 12 छात्रों को तीन साल और 27 को दो साल के लिए परीक्षा से वंचित कर दिया गया है।
हाईकोर्ट के आदेश के तहत इस मामले में विश्वविद्यालय स्तर पर फैसला लेने के लिए गठित जस्टिस एके गोहिल कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में इन संदिग्ध छात्रों के खिलाफ सजा की अनुशंसा कर दी है।

कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार जिन 12 छात्रों पर तीन साल के लिए परीक्षा में शामिल पर रोक लगाई गई है, उनकी कॉपियों में अलग से आंसर लिखना पाया गया है। जबकि 27 छात्रों की कॉपियों में अंकों में हेरफेर करना मिला है। इन छात्रों के खिलाफ दो साल के लिए परीक्षा में शामिल होने पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।
वहीं 97 छात्र ऐसे हैं, जिनकी कॉपियां अभी हैंडराइटिंग एक्सपर्ट के यहां से नहीं आई हैं। कमेटी की अनुशंसा के अनुसार इन छात्रों को शपथ पत्र देकर वर्ष 2015 की बीडीएस परीक्षा में शामिल होना होगा। अगर हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की रिपोर्ट में इन छात्रों की कॉपियों में भी ओवर राइटिंग या अंकों में हेरफेर होना साबित होता है] तो इनके खिलाफ भी दो और तीन साल तक प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई की जाएगी।

वर्ष 2013 में बीयू के सतत एवं प्रौढ़ शिक्षा विभाग में बीडीएस की परीक्षाएं हुई थी। स्पेशल टास्क फोर्स को इन परीक्षाओं में गड़बड़ी की शिकायत मिली थी। जांच में सामने आया था कि कुछ छात्रों की कॉपियां परीक्षा केंद्र से बाहर ले जाकर लिखी गई थी। एसटीएफ ने कुल 420 संदिग्ध छात्रों के खिलाफ कार्रवाई कर इनकी कॉपियां जब्त की थीं। इनमें से 136 की कॉपियों में गड़बड़ियां होना सामने आया था।
बीयू ने बाद में इन सभी 136 छात्रों के खिलाफ नकल प्रकरण बनाकर इन्हें तीन साल तक के लिए परीक्षा से वंचित कर दिया था। यूनिवर्सिटी के इस फैसले के खिफाफ यह सभी छात्र हाईकोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट ने बीयू को इन छात्रों की कॉपियों की दोबारा जांच कर इन्हें सुनवाई का मौका देने का फैसला सुनाया था।
हाईकोर्ट के आदेश के तहत बीयू ने अक्टूबर 2014 में रिटायर्ड जस्टिस एके गोहिल की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की थी। कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार जिन्हें शपथ पत्र के साथ परीक्षा में शामिल होने का मौका दिया गया है। इनमें 35 छात्र आरकेडीएफ, 34 ऋषिराज, 16 पीसीडीसी और 6-6 छात्र भाभा व मानसरोवर के हैं। वहीं जिन्हें तीन साल के लिए परीक्षा से वंचित किया गया है, उनमें 5-5 आरकेडीएफ और एक-एक भाभा व पीपुल्स डेंटल कॉलेज के हैं। इसी तरह जिन्हें दो साल के लिए परीक्षा से वंचित किया गया है, उनमें 25 छात्र मानसरोवर के और एक-एक ऋषिराज व आरकेडीएफ के हैं।