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एमएसजी

6 वर्ष पहले
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भोपाल। गुरमीत राम रहीम की विवादित फिल्म 'एमएसजी: द मैसेंजर' शुक्रवार को रिलीज हो रही है। फिल्म को जैसे-तैसे; कैसे भी हिट कराने की जिम्मेदारी उनके अनुयायियों ने उठाई है। भोपाल में गुरुवार को डेरा सच्चा सौदा से जुड़े लोगों ने रैली निकाली। इससे पहले शहर में पम्पलेट भी बांटे गए।
रैली में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं। यह रैली किसी चुनावी रैली से कम नजर नहीं आ रही थी। डेरा से जुड़े सैकड़ों लोग नाचते-गाते चल रहे थे। उनके हाथों में फिल्म के पोस्टर थे। भोपाल में यह फिल्म एक साथ कई सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है।
एमएसजी कुछ संशोधन और फिल्म के नाम में परिवर्तन के साथ शुक्रवार को 4 भाषाओं हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, तेलुगु और मलयालम में देशभर में रिलीज होगी। पहले यह फिल्म फिल्म 16 जनवरी को रिलीज होनी थी, लेकिन इससे पहले ही सेंसर बोर्ड की चेयरमैन व अन्य सदस्यों ने फिल्म पर आपत्तियां लगा दी थी। इसके बाद फिल्म ट्रिब्यूनल के पास भेजी गई थी। ट्रिब्यूनल ने फिल्म में कुछ आपत्तियों को दूर करने को कहा, लेकिन सेंसर बोर्ड के सदस्यों ने फिर इस पर आपत्ति जताई और अपना इस्तीफा दे दिया। हालांकि बाद में कानूनी लड़ाई के बाद फिल्म को झंडी मिल पाई।
जानिए डेरा सच्चा सौदा के बारे में...
यह एक आध्यात्मिक संगठन है। इसकी स्थापना 1948 में तब के संयुक्त पंजाब और अब के हरियाणा के सिरसा में की गई थी। संगठन के अनुयायियों में सिख और हिंदू धर्म के पिछड़े और दलित वर्गों के लोग शामिल हैं। डेरा समर्थकों ने 1998 के संसदीय चुनावों में अकाली दल और इस वर्ष पंजाब विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी का समर्थन किया था। संगठन के देशभर में आश्रम हैं। एक अनुमान के अनुसार डेरा सच्चा सौदा संगठन के लाखों अनुयायी हैं।
जानिए गुरमीत राम रहीम के बारे में..
शहंशाह मस्ताना के बाद शाह सतनाम जी को डेरे का गुरु बनाया गया था। वर्तमान डेरा प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम सिंह का जन्म 15 अगस्त, 1967 को राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के गुरुसर मोदिया में जाट सिख परिवार में हुआ था। गुरमीत राम रहीम सिंह अपने मां-बाप की इकलौती संतान हैं। उन्हें सात साल की उम्र में ही 31 मार्च, 1974 को तत्कालीन डेरा प्रमुख शाह सतनाम सिंह जी ने ये नाम दिया था। 23 सितंबर, 1990 को शाह सतनाम सिंह ने देशभर से अनुयायियों का सत्संग बुलाया और गुरमीत राम रहीम सिंह को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। गुरमीत राम रहीम सिंह ने कई किताबें लिखी हैं। समाज सेवा के लिए उन्होंने अनुयायियों को समूहों में बांट रखा है। हर समूह में करीब 30 गांव आते हैं।