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नदी बचाने

6 वर्ष पहले
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भोपाल। बड़े तालाब की जीवनरेखा कोलांस नदी निरंतर बहती रहे, नदी के बहाव को रोकने वाले सभी कारकों पर नियंत्रण स्थापित हो, इसके लिए जमीनी स्तर का सर्वे शुरू किया गया है।
गौरतलब है कि कोलांस नदी का बहाव दिन प्रतिदिन कम होता जा रहा है और इसके आसपास अवैध कॉलोनियों की बाढ़ आ गई है। सर्वे की शुरूआत जन अभियान परिषद ने सात दिन पहले की है। 28 फरवरी तक जमीनी स्तर का सर्वे प्रदेश के सभी 313 विकासखंड में होना है। सर्वे के बाद सामाजिक सहभागिता से नदी को बचाए रखने के लिए निरतंर काम करने की योजना बनाई जाएगी।

बड़े तालाब में मिलने वाली कोलांस नदी का चयन
भोपाल जिले में दो नदियां चयनित हुई हैं, जिन पर काम किया जाना है। फंदा ब्लॉक में कोलांस नदी का सर्वे हो रहा है। यह नदी सीहोर जिले के कोलांस कला से निकलती है और भोपाल के बड़े तालाब में मिलती है। नदी की लंबाई करीब 40 किमी है। इसी तरह बैरसिया विकासखंड में पारुआ नदी चयनित की गई है। पारुआ नदी करोंदिया से निकलकर ग्राम कलारा होते हुए सीहोर जिले की नदी से मिल जाती है। इसकी लंबाई 10 किमी है।

बन रही हैं अवैध कॉलोनियां
कोलांस नदी के कैचमेंट एरिए में नीलबड़ का क्षेत्र आता है, जहां कॉलोनियों काटी जा रही हैं। बिना प्लानिंग के हो रहे निर्माण से नदी पर प्रभाव पड़ना तय है। कैचमेंट में व्यवस्थित विकास करने के लिए बड़ी झील का मास्टर प्लान भी बन रहा था, लेकिन अभी तक यह अमल में नहीं आ पाया। कोलांस नदी के पास ही कलियासोत नदी है जिसके किनारों पर बिल्डरों ने कॉलोनियां तान दी हैं, जिससे नदी ही समाप्त होने की कगार पर है।

कहां-कहां हो रहा है काम
मप्र के हर ब्लॉक में एक नदी चिह्नित की जा रही है, जिसको बचाया जाना है। प्रदेश में 313 विकासखंड ब्लॉक हैं। इस तरह प्रदेश की 313 नदियों को बचाने पर काम हो रहा है। यह काम मप्र जन अभियान परिषद के द्वारा किया जा रहा है। जन अभियान परिषद, योजना एवं आर्थिक-सांख्यिकी विभाग के अंतर्गत आता है जिसके मंत्री जयंत मलैया हैं।

क्यों बचाई जा रही हैं छोटी नदियां
विकास के नाम पर नदी जल ग्रहण क्षेत्र में बढ़ते हुए अतिक्रमण के कारण अधिकतर नदियां धीरे-धीरे सिमटती जा रही है, जिनमें से अधिकांश नदियां मृतप्रायः हो गई हैं। बढ़ते हुए अतिक्रमण का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव छोटी नदियों पर पड़ता है इसलिए परिषद् द्वारा नदी संरक्षण एवं संवर्धन हेतु प्रथम चरण में प्रत्येक विकासखण्ड में एक-एक विलुप्तप्रायः छोटी नदी के अनुसार प्रदेश में कुल 313 छोटी नदियों का चयन किया गया। ये नदियां मुख्य अथवा सहायक नदियां हैं।

ऐसे बचेगी नदियां
चयनित नदियों के संरक्षण एवं पुर्नजीवन हेतु उनके विषय में विस्तृत जानकारी एकत्र करना, क्योंकि प्रत्येक नदी की अपनी विशिष्ट संरचना एवं विशेषता होती है। इस आधार पर ही उसके संरक्षण एवं पुर्नजीवन का कार्य किया जा सकेगा। प्रत्येक विकासखण्ड में चयनित छोटी नदियों के विषय में विभिन्न बिन्दुओं पर प्रारंभिक जानकारी एकत्र करने हेतु उनके उद्गम स्थल से संगम स्थल (मुख्य नदी में संगम) तक पैदल चलकर सर्वेक्षण किया जा रहा है। उसके बाद नदियों के संरक्षण हेतु विस्तृत कार्ययोजना का बनाई जाएगी।
27 बिंदुओं पर हो रहा है सर्वे
आओ बनाए मप्र के तहत जलसंरक्षण के लिए स्वयंसेवी संगठनों की मदद से काम हो रहा है। इसके लिए ब्लॉक की टीम को एक सर्वे फार्मेट दिया गया है। इस सर्वे फार्मेट में 27 बिंदु हैं। सर्वे में नदी के आसपास की जनसंख्या की जानकारी ली जा रही है। इसके साथ ही नदी पर हो रहे अतिक्रमण की जानकारी ली जा रही है। सर्वे होने के बाद जनसहयोग से ही नदी को बचाने का काम चलाया जाएगा। नदियों के सर्वे करने के बाद इसमें मृत पशुओं को डालने से रोका जाएगा। नदियों को जीवन देने के लिए मोरी बंधान बनाए जाएंगे। नदियों में पानी वर्षभर रहे, इसके लिए नदियों में आने वाले पानी के सोर्स को भी ठीक किया जाएगा।

पैदल-पैदल करेंगे सर्वे
भोपाल जिले की कोलांस और पारुआ नदी को बचाने के लिए चयन किया गया है। इसको कैसे बचाए रखें, इसके लिए सर्वे शुरू हो गया है। 28 फरवरी तक सर्वे होगा जिसमें पैदल-पैदल नदी के दोनों तरफ सर्वे किया जाएगा और फिर इस नदी को बचाए रखने के लिए काम किया जाएगा।

ललित शर्मा, जिला समन्वयक, जन अभियान परिषद
हर ब्लॉक में बचाई जाएगी एक नदी
मप्र के सभी 313 ब्लॉक में छोटी नदियां चयनित की गई हैं, जिन्हें बचाए रखने के लिए प्रयास किए जाना है। 7 दिन पहले सर्वे कार्य शुरू करने के लिए हर ब्लॉक में फार्मेट दिए गए हैं, जिसमें नदियों को खत्म करने या दूषित करने वाले कारकों का पता लगाया जाएगा । 28 फरवरी तक सर्वे कार्य पूरा करने के बाद जनसहयोग और स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से नदियों को बचाया जाएगा।
प्रवीण शर्मा, टास्क मैनेजर, जनअभियान परिषद