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चेन्नई में हुई भोपाल सेक्शन इंजीनियर की मौत

7 वर्ष पहले
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भोपाल। रेल कोच फैक्टरी निशातपुरा में पदस्थ सीनियर सेक्शन इंजीनियर शुभांगी कश्यप नौ दिन की विभागीय ट्रेनिंग पर चेन्नई गईं थीं। शुभांगी ट्रेनिंग में शामिल अन्य कुछ इंजीनियरों के साथ ट्रेनिंग के आखिरी दिन 25 फरवरी को समंदर किनारे महाबलीपुरम घूमने गईं थी। तभी जबरदस्त लहर आई और शुभांगी समेत अन्य छह लोगों को बहा ले गई। इसमें शुभांगी के साथ् ही अन्य दो की मौत हुई और बाकी चेन्नई में ही आईसीयू में भर्ती हैं। 

फ्लाइट से लाया जा रहा है शव
शुभांगी वर्धमान भोपाल के ग्रीन पार्क कॉलोनी में रहती थीं। उनके भाई किरण कुमार मगरे ने बताया कि शनिवार को उनका शव फ्लाइट से चेन्नई से उनका शव भोपाल लाया जा रहा है। 
 
तमिल में भरना पड़ा फार्म, तब जाकर हुआ पीएम,एक दिन की हो गई देरी
शुभांगी की मौत 25 फरवरी को चेन्नई के पास महाबलीपुरम में हाे गई थी। पत्नी की मौत की खबर सुनकर उनके पति विजय चेन्नई पहुंचे तो 26 को पूरे दिन पोस्टमार्टम ही नहीं हो पाया। पीएम के लिए जो फार्म भरा गया वह हिन्दी और अंग्रेजी में भरा गया जिसे वहां के स्टॉफ ने तीन बार फाड़ के फेंक दिया। उनका कहना था कि सिर्फ तमिल में भरा गया फार्म ही एक्सेप्ट होगा, उसकी का बाद पीएम होगा। तब उनके पति ने तमिल जानने वाले को तलाशा और फार्म भरा गया। अगले दिन 27 फरवरी को पीएम हुआ। 
 
तमिल आईडी से ही कर सकते हैं फ्लाइट में सफर
उसके बाद जब वे डैड-बॉडी को भोपाल लाने के लिए एयरपोर्ट पहुंचे तो वहां भी तमिलनाडु एवियेशन ने उनके आईडी कार्ड अंग्रेजी में होने के कारण मान्य नहीं किए। इसमें भी उनका तर्क था कि तमिल के आइडी कार्ड से ही फ्लाइट में जा सकते हैं। तब एयर इंडिया के फ्लाइट का इंतजार किया गया और इसमें एक दिन निकल गया।  एयर इंडिया की फ्लाइट भोपाल के लिए भी सीधे नहीं थी। इसपर पहले वे मुंबई पहुंचे और वहां से भाेपाल के लिए आ रहे हैं। 
 
रेलवे के अधिकारी, लेकिन रेलवे ने नहीं की मदद
शुभांगी के परिजनों ने आरोप लगाया कि शुभांगी और विजय दोनों रेलवे में हैं लेकिन रेलवे की तरफ से उन्हें कोई हेल्प नहीं मिली। विजय अपने स्तर पर ही सारे काम निपटा रहे हैं। 

पति भी सीनियर सेक्शन इंजीनियर
शुभांगी के पति विजय कश्यप भी रेल कोच फैक्टरी में सीनियर सेक्शन इंजीनियर हैं। पिछले साल ही उनका ट्रांसफर मुंबई से भोपाल हुआ था। शुभांगी के एक चार साल का लड़का है। शुभांगी के बच्चे की तबियत खराब थी इसलिए वे ट्रेनिंग पर जाना नहीं चाहती थी, लेकिन ट्रेनिंग अनिवार्य थी, इसलिए उन्हें जाना पड़ा।