मछली घर

7 वर्ष पहले
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भोपाल। म्युजियम की बिल्डिंग की बनावट हो या इसमें संरक्षित की गई मछलियां। सभी अपने आप में अदुभुत है। मछलियों के अनोखे एक्वेरियम ने विश्व में भारत अौर भोपाल को पहचान दिलाई थी। रोजाना सैकड़ों लोग इसे निहारने पहुंचते थे और दुर्लभ मछलियों को देखकर दंग रह जाते थे। पर अब यह नजारा नहीं दिखेगा, रखरखाव के अभाव में दुनिया के इस अद्भुत मछली घर पर अब ताला लग गया है। राजभवन के नजदीक बना यह मछली घर हमेशा से भोपाल आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। अब सरकार यहां पांच सितारा होटल और कंवेंशन सेंटर बनाने जा रही है।
37 साल पुराना, ‘डायरेक्टरी ऑफ वर्ल्ड एक्वेरिया’ में उल्लेख
यह मछली घर लगभग 37 पुराना है। डायरेक्टरी ऑफ वर्ल्ड एक्वेरिया में भी इसका उल्लेख है। जो अपने आप में एक गौरव की बात है। इसे मछली पालन विभाग के प्रमुख रहे जेबी दुबे ने बनवाया था। भोपाल के छोटे तालाब के किनारे बना यह मछली घर करीब तीन एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। कहा जाता है कि मुंबई के तारापुर फिश एक्वेरियम के बाद यह सबसे बेहतरीन एक्वेरियम है।
बेल्जियम से मंगाए थे 26 एक्वेरियम
जानकारों के मुताबिक जब मछली घर बनाया गया था, तब इसके एक्वेरियम बेल्जियम से मंगाए थे। करीब 26 एक्वेरियम वहां से मंगाए गए, जिनका वजन 3 क्विंटल है। यहां बेहद दुर्लभ प्रजातियाें वाली मछलियों को भी संरक्षित किया गया है। लेकिन अब इन मछलियों का क्या होगा, यह अभी तय नहीं है।
67 एक्वेरियम में संरक्षित होती थीं मछलियां
इस मछली घर में 67 एक्वेरियम हैं। जिसमें टाइगर आस्कर, फायर माउथ, मोनो एंजिल, किंग कोबरा, गोल्डन गौरामी, गोल्डन एंजिल, जेबरा डेनियो, किसिंग गौरामी गप्पी जैसी दुर्लभ मछलियों का संरक्षण किया गया था। वहीं प्रदेश में विलुप्ती की कगार पर पहुंच गई महाशीर मछली को भी यहां संरक्षित किया गया था।
मछली के आकार की बिल्डिंग
इस मछली घर के प्रति आकर्षण की एक बड़ी वजह इसकी बिल्डिंग भी रही है। मछली घर का आकार भी बिल्कुल मछली की तरह है, जिससे बच्चे और पर्यटक इसकी तरफ आकर्षित होते थे।