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विश्व हिंदी सम्मेलन: दुनियाभर में मप्र का नाम रोशन करने वाले साहित्यकारों की पूछपरख नहीं

Dainik Bhaskar

Sep 09, 2015, 11:45 AM IST

विश्व हिंदी सम्मेलन: दुनियाभर में मप्र का नाम रोशन करने वाले साहित्यकारों की पूछपरख नहीं

विश्व हिंदी सम्मेलन: दुनियाभर में मप्र का नाम रोशन करने वाले साहित्यकारों की पूछपरख नहीं
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भोपाल। मप्र की राजधानी भोपाल में 10-12 सितंबर तक होने जा रहे 10वें विश्व हिंदी सम्मेलन में स्थानीय साहित्यकारों को नहीं बुलाए जाने से नाराजगी पैदा हुई है। इस लिस्ट में कई ऐसे नाम भी शामिल हैं, जिन्होंने पद्मश्री या अन्य राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मान मप्र का हिंदी साहित्य में गौरव बढ़ाया है। ख्यात कवि राजेश जोशी तो अब तक हुए हिंदी सम्मेलनों की उपयोगिता पर ही सवाल उठाते हैं। वे कहते हैं, सरकार बताए कि क्या इन सम्मेलनों से हिंदी का भला हुआ है? जोशी के अलावा ध्रुव शुक्ल, रामप्रकाश त्रिपाठी, मेहरुन्निशा परवेज, राजेश शाह, विजय बहादुर जैसे नामचीन साहित्यकार भी सम्मेलन में खुद की उपेक्षा से आहत हैं।
पहले जानिए विश्व हिंदी सम्मेलन के बारे में...
हिन्दी भाषा का सबसे बड़ा अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन। इसमें विश्वभर से हिन्दी विद्वान, साहित्यकार, पत्रकार, भाषा विज्ञानी, विषय विशेषज्ञ तथा हिन्दी प्रेमी जुटते हैं। पिछले कई वर्षोँ से यह प्रत्येक चौथे वर्ष होता है। 1975 में विश्व हिन्दी सम्मेलनों की सीरिज शुरू हुई। इसकी पहल पूर्व प्रधानमन्त्री स्व. इन्दिरा गांधी ने की थी। पहला विश्व हिन्दी सम्मेलन राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के सहयोग से नागपुर में हुआ था।
अब तक यहां हुए सम्मेलन...
क्रम तिथि नगर देश
1 10-14 जनवरी 1975 नागपुर भारत
28-30 अगस्त 1976 पोर्ट लुई मारीशस
3 28-30 अक्टूबर 1983 नई दिल्ली भारत
4 2-4 दिसम्बर 1993 पोर्ट लुई मारीशस
5 4-8 अप्रैल 1996 त्रिनिडाड-टोबेगो त्रिनिदाद और टोबैगो
6 14-18 सितम्बर 1999 लंदन संयुक्त राजशाही
7 5-9 जून 2003 पारामरिबो सूरीनाम
8 13-15 जुलाई 2007 न्यूयार्क संयुक्त राज्य अमेरिका
9 22-24 सितम्बर 2012 जोहांसबर्ग दक्षिण अफ्रीका
अंदर पढ़ें किस साहित्यकार ने क्या कहा और जानें सम्मेलन से जुड़ीं अन्य बातें...

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