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भोपाल

5 वर्ष पहले
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भोपाल। सियाचिन यहां चौकसी करने वाले जवानों की जीवटता के कारण फिर चर्चा में है। पृथ्वी के दक्षिणी छोर पर स्थित अंटार्कटिका में जीवन सियाचिन के सैनिकों की तरह मुश्किल होता है। भोपाल के डॉ. प्रकाश खातरकर भी 14 महीने तक अंटार्कटिका में रिसर्च करके लौटे हैं। वे बता रहे हैं, कितना मुश्किल होता है वहां का जीवन। पढ़ें, क्या होती हैं अंटार्कटिका की चुनौतियां...
- अंटार्कटिका में पृथ्वी का साउथ पोल है। वहां का तापमान माइनस 55 डिग्री से लेकर माइनस 89 डिग्री तक होता है। सामान्य व्यक्ति को वहां जाने की अनुमति नहीं है।
- सिर्फ वैज्ञानिक ही वहां रिसर्च के लिए जाते हैं, क्योंकि वहां का वातावरण बिल्कुल प्रदूषित नहीं है। मैं वहां आयन मंडल में संचार की संभावनाओं पर रिसर्च करने गया था।
- वहां छह महीने तक दिन होता है और छह महीने पूरी तरह रात होती है। जहां देखो वहां सिर्फ बर्फ है। साउथ अफ्रीका से विमान के जरिये वहां जाते हैं। अंटार्कटिका जाने से पहले हिमालय की बर्फ में ट्रेनिंग दी जाती है।
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