पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

भोपाल-१

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
भोपाल। दिल्ली, मुंबई और जयपुर, चेन्नई और बंगलुरू के साथ-साथ कुछेक सालों के अंदर मध्य प्रदेश में भी मेट्रो ट्रेन दौड़ने लगेगी। जापान से आए दल ने इस संबंध में अपना प्रेजेंटेशन दिया। इसमें बताया कि जापान में मेट्रो ट्रेन अपनी स्पीड और सर्विस के कारण बहुत लोकप्रिय है। टोक्यो में 60% लोग मेट्रो में सफर करते हैं। बाकी लोग कार में सफर करते हैं। जानिए मेट्रो ट्रेन का रोचक इतिहास...
भोपाल में 2019 और इंदौर में 2020 तक मेट्रो प्रोजेक्ट का पहला चरण पूरा हो जाएगा। जापान इंटरनेशनल कारपोरेशन एजेंसी (जायका) ने पिछले साल अक्टूबर में सिर्फ 0.3 प्रतिशत दर पर करीब 15000 करोड़ का लोन स्वीकृत किया है।
टाइमिंग...
मेट्रो रेल का समय सुबह 5 बजे से रात 12 बजे तक होगा। दोनों शहरों में 30-30 स्टेशन बनाए जाएंगे। इन स्टेशनों के आसपास पार्किंग और स्टेशन से शहर के अन्य हिस्सों में जाने के लिए ट्रांसपोर्ट उपलब्ध रहेगा।

लागत...
भोपाल के मेट्रो प्रोजेक्ट पर पहले चरण में 6962 करोड़ और इंदौर में 8200 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। पूरे प्रोजेक्ट पर खर्च होने वाले 15,162 करोड़ का 80 फीसदी यानी 12,129 करोड़ रुपए जायका लोन के रूप में देगा। शेष राशि 3,033 करोड़ रुपए केंद्र सरकार का अनुदान होगा।
जायका के 12,129 करोड़ में से 3,033 करोड़ रुपए लोन राज्य सरकार के नाम होगा। शेष 9,096 करोड़ रुपए का लोन मेट्रो रेल प्रोजेक्ट का क्रियान्वयन करने के लिए गठित कंपनी के नाम होगा। यानी राज्य सरकार का अनुदान भी जायका के लोन में शामिल है।
चार लाख लोग करेंगे यात्रा
मप्र मेट्रो रेल कार्पोरेशन लिमिटेड के एमडी विवेक अग्रवाल के मुताबिक, पहले चरण में 4 लाख लोग मेट्रो का उपयोग करेंगे। अभी करीब एक लाख लोग लो फ्लोर बसों का उपयोग करते हैं। मेट्रो के बावजूद इस संख्या में कमी नहीं आएगी।
कंपनियों की खासियत
हिताची-1910 में स्थापित एक टोटल रेल सिस्टम सॉल्यूशन कंपनी है। हाई स्पीड, इंटरसिटी, मोनो रेल सिस्टम, मेट्रो सिस्टम, लाइट रेल व्हीकल और स्ट्रीट कार सब कुछ बनाती है।
कावासाकी-1896 में स्थापित कंपनी। हाई स्पीड ट्रेन, लोकोमोटिव, पैसेंजर कोच, मोनो रेल, फ्रेट व्हीकल आदि बनाती है। शिप, एयरोस्पेस आदि क्षेत्रों में भी काम करती है। कंपनी 1950 से भारत में काम कर रही है।
नियोन सिग्नल-1928 में स्थापित। आटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम, प्लेटफाॅर्म स्क्रीन डोर और डिजास्टर अलार्म सिस्टम बनाती है। दिल्ली व चेन्नई मेट्रो में भी कंपनी ने काम किया है।
मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक- 1921 में अस्तित्व में आई। रेलवे ट्रेक्शन सिस्टम यानी पॉवर सप्लाई की अग्रणी कंपनी है। जापान के ट्रेक्शन सिस्टम में 50 फीसदी भागीदारी है। भारत में दिल्ली, जयपुर, मुंबई, नवी मुंबई, हैदराबाद, बंगलुरू और चेन्नई में मेट्रो के ट्रेक्शन सिस्टम मित्सुबिशी ने डेवलप किए हैं।
ऐसी होती है लाइट मेट्रो
जर्मनी, सऊदी अरब, दुबई और पौलेंड में लोकप्रिय।
30 से 40 किमी प्रति घंटा रफ्तार।
मोनो और हेवी मोनो ट्रेन की तुलना में सस्ती।
बोगियां मेट्रो की तुलना में छोटी व हल्की।
एक रूट की ट्रेन आसानी से दूसरे रूट पर भी जा सकती है।
परिचालन और रखरखाव का खर्च कम।
कम आबादी वाले शहरों के लिए मुफीद।
आगे पढ़ें रोचक जानकारियां...
खबरें और भी हैं...