भोपाल। लांस नायक हनुमनथप्पा के शहीद होने के बाद सियाचिन चर्चाओं में हैं। इस मौके पर dainikbhaskar.com ने सियाचिन में तैनात रह चुके, फिलहाल भोपाल में पदस्थ आर्मी अफसरों से वहां के बारे में जानकारी ली। आर्मी अफसर बताते हैं कि वहां तैनात जवानों को दुश्मन की गोली के बजाय विपरीत जलवायु और हिमस्खलन से हर दूर लड़ना होता है। पढ़िए पूरी कहानी...
अब तक हो चुकी है करीब 900 जवानों की मौत
कर्नल केपी सिंह और कर्नल एस कुमार के मुताबिक सियाचिन की समुद्र से उंचाई करीब 21 हजार फीट है। वहां का तापमान माइनस 40 डिग्री तक पहुंच जाता है। पिछले 30 सालों में सियाचिन में पदस्थ करीब 900 जवान शहीद हो चुके हैं। इनकी जान सियाचिन की विपरीत जलवायु और हिमस्खलन की वजह से गई है।
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