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नर्मदा नदी

5 वर्ष पहले
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भोपाल। 14 फरवरी को नर्मदा जयंती मनाई गई। कहा जाता है कि गंगा नदी में नहाने पर व्यक्ति उसी दिन पवित्र होता है, तो नर्मदा में नहाने पर तुरंत पवित्र हो जाता है। इन सबसे अलग, मप्र की लोककथाओं में नर्मदा नदी की एक अधूरी प्रेम कहानी भी सुनाई जाती है। प्रेमी से नाराज होकर वे उलटी दिशा में बहने लगी थीं। पढ़िये, प्रेमी से क्यों नाराज हुई नर्मदा?...
नर्मदा नदी को चिरकुंवारी भी कहा जाता है। एक कहानी यह भी है कि मां गंगा खुद साल में एक बार नर्मदा स्नान करने आती हैं। नर्मदा नदी अमरकंटक में स्थित मैकाल पर्वत श्रृंखला से निकलती है और पश्चिम की ओर बहती हुई अरब सागर में मिलती है। मप्र की लोककथाओं में नर्मदा नदी से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं।
पहली कहानी
नर्मदा और सोनभद्र की शादी तय हुई थी। नर्मदा की एक दासी थी जुहिला। शादी के लिए विवाह मंडप में जाने से पहले उन्हें पता चला कि सोनभद्र के जुहिला के साथ रिश्ते हैं। जुहिला और सोनभद्र भी नदी है। नर्मदा ने इसे अपना अपमान समझा और मंडप छोड़कर उलटी दिशा में चल पड़ीं। सोनभद्र ने नर्मदा को वापस बुलाने की भी कोशिश की, लेकिन वे नहीं आईं। कहा जाता है कि आज भी नर्मदा सोनभद्र से अलग दिखाई देती है।
दूसरी कहानी
इस कहानी में नर्मदा को रेवा के नाम से जाना जाता है और राजा मैखल की पुत्री बताया गया है। उन्होंने नर्मदा से शादी के लिए घोषणा की कि जो राजकुमार गुलबकावली के फूल उनकी बेटी के लिए लाएगा, उसके साथ नर्मदा का विवाह होगा। सोनभद्र यह फूल ले आए और उनका विवाह तय हो गया।
दोनों की शादी में कुछ दिनों का समय था। नर्मदा सोनभद्र से कभी मिली नहीं थीं। उन्होंने अपनी दासी जुहिला के हाथों सोनभद्र के लिए एक संदेश भेजा। जुहिला ने नर्मदा से राजकुमारी के वस्त्र और आभूषण मांगे और उसे पहनकर वह सोनभद्र से मिलने चली गईं। सोनभद्र जुहिला को राजकुमारी समझा। जुहिला की नियत भी डगमगा गई और वह सोनभद्र का प्रणय निवेदन ठुकरा नहीं पाई। काफी समय बीता, जुहिला नहीं आई, तो नर्मदा का सब्र का बांध टूटा। वह खुद सोनभद्र से मिलने चल पड़ीं। वहां जाकर देखा तो जुहिला और सोनभद्र को एक साथ पाया। इससे नाराज होकर वह उलटी दिशा में चल पड़ीं। उन्होंने बंगाल सागर की बजाय अरब सागर की ओर दौड़ लगाई।
तीसरी कहानी
सोनभद्र नदी को नद (नदी का पुरुष रूप) कहा जाता है। दोनों के घर पास थे। अमरकंटक की पहाड़ियों में दोनों का बचपन बीता। दोनों किशोर हुए तो लगाव और बढ़ा। दोनों ने साथ जीने की कसमें खाई, लेकिन अचानक दोनों के जीवन में जुहिला आ गई। जुहिला नर्मदा की सखी थी। सोनभद्र जुहिला के प्रेम में पड़ गया। नर्मदा को यह पता चला तो उन्होंने सोनभद्र को समझाने की कोशिश की, लेकिन सोनभद्र नहीं माना। इससे नाराज होकर नर्मदा दूसरी दिशा में चल पड़ी और हमेशा कुंवारी रहने की कसम खाई।
कहा जाता है कि इसीलिए सभी प्रमुख नदियां बंगाल की खाड़ी में मिलती हैं, लेकिन नर्मदा अरब सागर में मिलती है।
आगे की स्लाइड्स में देखें नर्मदा नदी की कुछ खूबसूरत photos...
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