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मोदी

4 वर्ष पहले
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भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा का 92 साल की उम्र में बुधवार को निधन हो गया। भाजपा के वयोवृद्ध नेता कहे जाने वाले पटवा अपने कड़क स्वभाव की वजह से जाने जाते थे। इस मौके पर dainikbhaskar.com बता रहा है उनके जीवन की कही-अनकही बातों के बारे में।
पुरानी बातें
- बात 1998 की है। उस समय मध्य प्रदेश में जल्दी ही विधानसभा के चुनाव होने वाले थे। प्रदेश के बीजेपी लीडर ये मानकर चल रहे थे कि इस बार सरकार बननी पक्की है। ऐसे में, बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री नरेंद्र मोदी को एमपी का प्रदेश प्रभारी बनाकर भोपाल भेज दिया। पार्टी ने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि इससे पहले मोदी को जहां भी प्रभारी बनाकर भेजा गया, वहां बीजेपी की सरकार बनी। कुशाभाऊ ठाकरे उस समय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे।
- मध्य प्रदेश आते ही नरेंद्र मोदी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर हमला करना शुरू कर दिया। पटवाजी और बीजेपी के संगठऩ मंत्री कृष्णमुरारी मोघे को मोदी को मध्य प्रदेश भेजा जाना पसंद नहीं आया। उन्होंने इस बात की शिकायत कुशाभाऊ ठाकरे से भी की। उन्होंने कहा कि जब मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार बन ही रही है तो जीत का सेहरा नरेंद्र मोदी के सिर पर क्यों बांधा जा रहा है। पटवाजी कहते थे कि ये बाहर का आदमी मध्य प्रदेश में आकर क्या कर रहा है।
नरेंद्र मोदी उस समय प्रदेश के शक्तिशाली पटवा खेमे के नेताओं के अघोषित बायकॉट के शिकार थे। मोदी उस समय अपने आपको अपनी ही पार्टी में, अपने ही लोगों के बीच अछूत जैसा महसूस करते थे। ये खेमा मोदी के सामने न तो कोई बात करता था और ना ही उनकी सलाह लेता था। ऐसी हालत में बैठकों में मोदी अपनी बात कहकर चले जाते थे। हालात इतने खराब थे कि मोदी अपनी देखभाल के लिए दो-तीन लोगों को दिल्ली से साथ लेकर आते थे।
(पत्रकार दीपक तिवारी की पुस्तक 'राजनीतिनामा मप्र : राजनेताओं के किस्से' से साभार)
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