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समाचार महानगर का

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Dainik Bhaskar

Dec 17, 2016, 12:42 PM IST
बेल्जियम के एमपी-4 ने तानसेन सम बेल्जियम के एमपी-4 ने तानसेन सम
ग्वालियर। सात समंदर पार यूरोपीय राष्ट्र बेल्जियम से आए "एमपी-4 क्वाटेंट" समूह ने जो म्यूजिक सुनाया, श्रोता दूसरी दुनिया में पहुंच गए। ऐसा लगा कि पूरा तानसेन समारोह ग्लोबल हो गया। इसके बाद बुवा घराने के वायोलिन वादक अतुल उपाध्याय और बांसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया के शिष्य संतोष संत की जुगलबंदी की, तो श्रोता अपना सुधबुध खो बैठे। इसके पहले सुबह की हल्के सर्द मौसम में संगीतज्ञों ने अपने गायन के सुर इस तानसेन की धरती पर बिखेरे। तानसेन समारोह का दूसरा दिन............
-तानसेन समारोह के दूसरे दिन की शाम की सभा में बेल्जियम से आए संगीतज्ञों ने अपने देश के विशिष्ट, मगर भारत से मिलते-जुलते वाद्य यंत्रों से अलग ही अंदाज में शास्त्रीय संगीत के सुर बिखेरे।
- बेल्जियम के "एमपी-4 क्वाटेंट" समूह ने जो म्यूजिक सुनाया, श्रोता दूसरी दुनिया में पहुंच गए। वर्ष-2008 में बने इस समूह ने अनुभव के आधार पर सांगीतिक अभिव्यक्ति की नई पहचान दी है।
-समूह में डेजेल, पावेल हास, प्राजक और कोनोस शामिल हैं। विविध कलात्मक प्रदर्शन के लिए इस समूह की पहचान है। थियेटर, नृत्य, पर्व-त्यौहार आदि में इस समूह ने गहरी छाप छोड़ी है।
बांसुरी और वायोलिन के जुगलबंदी
-बांसुरी की सम्मोहनी टेर और वायोलिन की करुण पुकार। फिर दोनों से साझा सुर झर रहे हों तो रसिकों को तो इनके मोहपाश में बंधना ही था। यह जुगलबंदी पेश की बुवा घराने के वायोलिन वादक अतुल उपाध्याय और प्रख्यात बांसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया के संतोष संत ने। जुगलबंदी की शुरुआत राग " जोग" से की है।
हल्के सर्द मौसम में मीठी रागनियां
-इसके पहले सुबह की सभा में हल्के सर्द मौसम में जब तानसेन समारोह के दूसरे दिन संगीतज्ञों ने मीठी-मीठी राग-रागनियां छेड़ीं तो संगीत श्रोताओं खो गए।
-कोलकाता से आईं शाश्वती बागची ने ठुमरी पर राग गुर्जरी तोड़ी का गायन किया वहीं, देश के युवा वायोलिन वादकों में शुमार शरतचंद ने राग "शुद्ध सारंग" से सुरों की झड़ी लगा दी। इसके बाद मंजरी आलेगांवकर ने गायन किया तो घरानेदार गायकी जीवंत हो उठी।
-शनिवार को तानसेन समारोह का दूसरा दिन था। शुरुआत पारंपरिक तरीके से शंकर गंधर्व संगीत महाविद्यालय छात्रों ने ध्रुपद गायन से की।
-सबसे पहली प्रस्तुति कोलकाता से आई किराना घराने की गायिका शाश्वती बागची की थी। उन्होंने ठुमरी "छैलवा ना डारो रे गुलाल" सुनाई तो संगीत रसिक लोकरस में सराबोर हो गए।
-मधुर आवाज की धनी शास्वती बागची ने राग 'गुर्जरी तोड़ी' से अपने गायन की शुरुआत की। उन्होंने विलंबबित एक ताल में बंदिश "जा जा रे पथिकवा" का गायन किया और छोटा ख्याल द्रुत में "मानो मानो मोरी बात" सुनाया।
वायोलिन की मिठास में डूबे संगीत रसि
-सेनिया घराने के वायोलिन वादक शरतचंद श्रीवास्तव नई दिल्ली इस सभा के दूसरे कलाकार थे। शरतचंद ने राग "शुद्ध सारंग" से अपने वायोलिन वादन की शुरुआत की है।
-उनके वायोलिन से झर रहे सुरों की मिठास में रसिक गोता लगाते नजर आए।उन्होंने अपने वादन का समापन पूर्वी अंग की एक लोक धुन निकालकर किया।
मंजरी ने जीवंत की घराने की गायकी
-"हू तौ जैहों पिया के देश कर सोलह श्रंगार" राग जौनपुरी और तीन ताल में विलंबित यह बड़ा ख्याल जब मंजरी आलेगांवकर ने सुनाया तो घरानेदार गायकी जीवंत हो उठी।
-उन्होंने इसी कड़ी में छोटा ख्याल “अल्ला मौला रे तेरो नाम” प्रस्तुत किया। इसके पश्चात राग देशकार में पहले झपताल के बाद तीन ताल में छोटा ख्याल “कलन लागी श्याम लरकईंयां” का गायन किया।
हरि हरि कुंजन में हरी हरी डार
-शनिवार की प्रात:कालीन सभा में अंतिम प्रस्तुति के रूप में नई दिल्ली के सुप्रसिद्ध मलिक बंधुओं की ध्रुपद जुगलबंदी हुई।
-दरभंगा घराने की संगीत परंपरा के तेरहवीं पीढ़ी के प्रतिनिधि प्रशांत और निशांत मलिक ने राग मधुवंती में नोम-तोम के आलाप से ध्रुपद गायन का आगाज किया।
चतुर्थ सभा (प्रात:) 18 दिसंबर
-ध्रुपद केन्द्र ग्वालियर के ध्रुपद गायन से यह सभा शुरू होगी। इसके बाद विश्व संगीत के तहत एनी हॉयत नार्वे की प्रस्तुति होगी।
-इस सभा में मधुप मुदगल नई दिल्ली का गायन, सुवीर मिश्र मुंबई का रूद्रवीणा वादन और सुहास व्यास पुणे का गायन होगा।
पंचम सभा (सायंकाल) 18 दिसंबर
-तानसेन संगीत महाविद्यालय ग्वालियर के ध्रुपद गायन से सभा की शुरूआत होगी। विश्व संगीत की श्रृंखला में जोहर इजा़क फ्रेस्को इसराइल की प्रस्तुति देंगे।
-इसके बाद कमलेश तिवारी भोपाल का ध्रुपद गायन, शोभा चौधरी इंदौर का गायन तथा किरण देशपांडे एवं सुप्रीत देशपांडे भोपाल के तबला जुगलबंदी से सभा का समापन होगा।
स्लाइड्स में देखिए तानसेन समारोह के फोटोज..............
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बेल्जियम के एमपी-4 ने तानसेन समबेल्जियम के एमपी-4 ने तानसेन सम
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