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२५ सितम्बर से २० अक्टूबर तक मनाया जाएगा कृषि महोत्सव

7 वर्ष पहले
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इंदौर. कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिये पूरे प्रदेश में राज्य शासन द्वारा प्रभावी प्रयास किये जा रहे हैं। इसी सिलसिले में किसानों को खेती किसानी की आधुनिक एवं उन्नत तकनीकों की जानकारी देने के लिये पूरे प्रदेश में एक साथ 25 सितम्बर से 20 अक्टूबर तक कृषि महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान सभी गांवों में किसान रथ पहुंचेगा। इस रथ के माध्यम से कृषि वैज्ञानिक और कृषि विभाग के अधिकारी किसानों को खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने के संबंध में जानकारी देंगे। इस महोत्सव के अंतर्गत सर्वश्रेष्ठ कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा कि वे कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिये गेंहूं चने सहित अन्य फसलों के उन्नत और नयी किसानों के बीजों का इस्तेमाल करें। गेंहूं एवं चने के १५ साल से पुरानी किस्मों के बीजों को चलन से बाहर किया जाएगा।

यह जानकारी आज सुबह रेसिडेंसी कोठी में कृषि उत्पादन आयुक्त आर.के. स्वाई की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई कृषि एवं सहकारिता विभाग की उच्चस्तरीय संभागीय बैठक में दी गयी। बैठक में प्रमुख सचिव कृषि डॉ.राजेश राजौरा, संभागायुक्त संजय दुबे, सहकारिता आयुक्त मनीष श्रीवास्तव, एमडी मार्कफेड बी.एम.शर्मा सहित कृषि एवं सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा इंदौर संभाग के जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त स्वाई ने इंदौर संभाग के जिलेवार खरीफ के दौरान हुई बोनी की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने आगामी रबी के लिये जिलेवार बनायी जा रही कार्य योजना की भी जानकारी ली। बैठक में स्वाई ने कहा कि खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिये जरूरी है कि कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जाए। इसके लिये उन्नत एवं आधुनिक तकनीक से खेती करना अत्यंत जरूरी है। बैठक में बताया गया कि इसके लिये जरूरी है कि किसानों को नगद फसलों जैसे गन्ना, सरसो, मसूर, मटर आदि की खेती के लिये प्रेरित किया जाए। उपलब्ध सिंचाई जल का भरपूर उपयोग किया जाए। फसलों के विविधिकरण पर ध्यान दिया जाए। अंतरवर्तिय सल को बढ़ावा दें। फसल चक्र में दलहनी फसल पर भी ध्यान दें। जलवायु परिवर्तन के मद्देनजर कार्ययोजना तैयार की जाए। बाजार की मांग को देखते हुए व्यवसायिक फसलों को प्राथमिकता दें। बीजों के उपचार के लिये किसानों को प्रेरित किया जाए। जुताई, बुआई, गहायी हेतु किसानों को प्रेरित किया जाए कि वे उन्नत कृषि यंत्रों का उपयोग करें। एक ही किस्मों की बुआई नहीं करें। उसमें बदलाव लाया जाए। उन्नत एवं नयी किस्मों के बीजों का उपयोग करने के लिये किसानों को प्रेरित किया जाए।