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यूनिवर्सिटी प्रोफेसरों के तबादले का मामला फिलहाल ठंडे बस्ते में, अगले सत्र में लागू करेंगे

7 वर्ष पहले
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इंदौर. उच्च शिक्षा विभाग द्वारा अब शासकीय कॉलेजों की तरह ही यूनिवर्सिटी प्रोफेसरों के भी तबादलों के निर्णय के जबरदस्त विरोध के कारण फिलहाल मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। शासन ने तय किया है कि इसे अगले सत्र से लागू किया जाएगा। तब तक इसकी बारीकियों को प्रोफेसरों को समझाया जाएगा। साथ ही प्रोफेसरों की जो आशंका या लीगल परेशानी है, उसे भी दूर किया जाएगा। इस मामले में उच्च शिक्षा विभाग के नए आयुक्त और प्रमुख सचिव भी कुछ बिंदुओं पर विचार कर रहे हैं।

तबादले पर इसलिए सवाल उठाए थे प्रोफेसरों ने

यूनिवर्सिटी में रहकर रिसर्च कर रहे प्रोफेसरों का तबादला होने पर पेपर प्रेजेंटेशन और रिसर्च किस यूनिवर्सिटी के खाते में जुडेगा।

- डायरेक्टर या एचओडी का तबादला होने की स्थिति में संबंधित विभाग की व्यवस्था ही गड़बडा जाएगी।

- तबादलों के चलते यूनिवर्सिटी के विभागों में भी सरकारी कॉलेजों की तरह कई विषयों के प्रोफेसरों की कमी का अंदेशा रहेगा।

- कई यूनिवर्सिटी की वित्तीय हालत खराब। अगर तबादले हुए तो इसका असर प्रोफेसरों को वेतन-भत्ता देने पर भी असर पड़ेगा।



सेल्फ फायनेंस विभागों को लेकर भारी असमंजस

इस पूरे मामले में सेल्फ फायनेंस विभागों के प्रोफेसरों में असमंजस है। उनके तबादले होंगे या नहीं यह तय नहीं है। अगर ऐसा होता है तो कई यूनिवर्सिटी को बजट ही पूरी तरह गड़बडा जाएगा। वजह यह है कि शासन ने ज्यादातर यूनिवर्सिटी को अनुदान देना लगभग बंद कर दिया है। महज १ से २ करोड़ रुपए अनुदान दिया जा रहा है। जबकि डीएवीवी का बजट ही २०० करोड़ रुपए सालाना है। ऐसे में तबादलों से यूनिवर्सिटी का पूरा सिस्टम गड़बड़ाने का अंदेशा है।