इंदौर. बड़वानी क्षेत्र में अवैध खनन को लेकर नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर द्वारा की याचिका पर सुनवाई हुई।
पाटकर ने हाई कोर्ट में कहा कि जब बांध बनाने के लिए अधिग्रहण हुआ तो वहां पर खनन कैसे हो रहा है। किनारों के दोनों तरफ जमकर रेती निकाली जा रही है, लेकिन शासन, प्रशासन को नजर नहीं आ रहा। इस पर एमओईएफ भी जवाब देने को तैयार नहीं है।
जस्टिस शांतनु केमकर, जस्टिस जेके जैन की डिविजन बेंच के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। पाटकर ने कहा कि सरकारी दस्तावेज भी बता रहे हैं कि खनन की परमिशन किसी स्तर पर नहीं हुई है। एनवीडीए तो मानने को भी तैयार नहीं है कि उसने खनन संबंधी कोई परमिशन नहीं दी है।
सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी नदी किनारे खनन प्रतिबंधित किए जाने के फैसले दे रखे हैं। पाटकर ने कोर्ट को किनारों पर खनन के सोमवार सुबह ही लिए गए फोटोग्राफ भी दिखाए। इस पर हाई कोर्ट ने शासन व संबंधित विभागों से पूछा है कि खनन क्यों और किसकी अनुमति पर किया जा रहा है। यह भी पूछा है कि जमीन अधिग्रहण किस उपयोग के लिए किया है और इसका फिलहाल किस रूप में उपयोग हो रहा है। 6 अक्टूबर तक इसकी रिपोर्ट देने के लिए कहा है।