राधेश्याम के आवाज लगाते ही कौओं का झुंड जाता है।
रतलाम/इंदौर.
श्राद्ध में कौए ढूंढने से नहीं मिलते, लेकिन रतलाम में एक युवक ऐसा है जिसकी आवाज सुनते ही कौओं का झुंड उमड़ पड़ता है। युवक की आवाज की सहायता से श्राद्ध में कई लोग कौओं को भोजन करा रहे हैं। ये है राधेश्याम पिता परसराम परमार।
मालीकुआं निवासी राधेश्याम 'कांव-कांव' की आवाज करता है तो आसपास कौओं का झुंड लग जाता है।
श्राद्ध पक्ष में कौओं के लिए भोजन लेकर पहुंचे मनीष, संदीप, मोहित, राजू, दिनेश चौहान ने बताया कौए सिर्फ राधेश्याम की आवाज सुनकर ही आते हैं। उनका दिया खाना ही खाते हैं। लोग टिफिन में घर से खाना लेकर आते हैं और राधेश्याम की मदद से कौओं को बुलाकर भोजन कराते हैं।
मवेशी चराने के दौरान हुई दोस्ती - राधेश्याम किसान परिवार से है। घर के मवेशी चराने का जिम्मा राधेश्याम का ही है। मवेशी चराने वो घर से डेढ़ किमी दूर करमदी रोड पर जाता है। राधेश्याम ने बताया खाली वक्त में उसने पशु-पक्षियों की आवाजें निकालने का अभ्यास किया। वह कई पशु-पक्षियों की आवाज निकाल लेता है, लेकिन कौए की आवाज निकालने में ज्यादा मजा आता है। इसकी वजह से उसकी आवाज सुन आसपास कौओं का झुंड आ जाता है। अब तो यह सामान्य बात हो गई है। कौओं को बुलाने में मजा आने लगा है। कौओं के लिए वह अक्सर घर से रोटी ले जाता है। कभी कचौरी-समोसे तो कभी अन्य खाद्य सामग्री भी ले जाता है। यह सिलसिला करीब 6 साल से चल रहा है।
श्राद्ध में बढ़ जाती है व्यस्तता - राधेश्याम के इस हुनर से परिचित लोग श्राद्ध में कौओं के लिए भोजन लेकर पहुंचते हैं। राधेश्याम के अनुसार दिनभर में कई लोग आते हैं। वो हर बार कौओं को बुलाकर भोजन कराता है। राधेश्याम के पिता परसराम का कहना है श्राद्ध में कौओं तक भोजन पहुंचाना जनसेवा है। उन्हें बेटे पर नाज है।
इनपुट - हरिओम राय, फोटो- प्रदीप नागौरा।
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