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तवा फाड़ निकला यह अक्षय वट, इंद्र को मिली थी ब्रम्ह हत्या के पाप से मुक्ति

7 वर्ष पहले
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(इसी वटवृक्ष् को मां पार्वती ने स्थापित किया था।)
इंदौर/उज्जैन। प्रदेश का यह पौराणिक नगर जहां एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। वहीं, पितृ मुक्ति और श्राद्ध तर्पण आदि की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। कहा जाता है कि यहां पिंडदान आदि क्रियाकर्म करने से मृत आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। मंगलनाथ के समीप शिप्रा नदी के तट पर सिद्धवट ऐसा ही एक स्थल है जहां नारायण बलि की पूजा के साथ ही पिंडदान करने से जन्म जन्मांतर के पितर तर जाते हैं।

इस सिद्ध क्षेत्र को सिद्धवट कहते हैं। यह इसी नाम से ही पहचाना जाता है। यह अत्यंत प्राचीन और सिद्ध क्षेत्र है। यहां अतिप्राचीन वटवृक्ष है, जिस पर पूजन अर्चन और जल व क्षीर अर्पित करने से पितरों की शांति होती है। इस क्षेत्र के वातावरण में ही अलग ही शांति का अनुभव होता है। यहां पहुंचकर ऐसा लगता है जैसे व्यक्ति अतीत के किसी कोने में ही आ पहुंचा है।

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