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५ दिन से ६० फीट की उंचाई पर चढ़ा है डांगी, उतरने की मांग रखी है अजीब

7 वर्ष पहले
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रामनिवास डांगी, जो टावर पर चढ़ा है।
इंदौर/नीमच. सालभर पहले गांव में सड़क की मांग को लेकर पानी की टंकी पर चढ़ने वाले सुवाखेड़ा का अन्ना उर्फ रामनिवास डांगी इस बार टावर पर चढ़ गया है। इस बार उसकी मांग है कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान उसके गांव में आएं और गांव की अधूरी सड़कों को पूरी की जाए।
गांव की तो कुछ समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर रामनिवास डांगी सात दिन से टावर की 70 फीट उंचाई पर बैठा है। टावर के पास रात-दिन पुलिस की गश्त लगी। डांगी टावर पर जहां बैठा है अपने पास बजरंगबली का फोटो और झंडियां लगा रखी है। साथ ही, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को दिए ज्ञापन टावर पर टांग रखे हैं। पुलिस का सख्त पहरा है। अभी तक जावद थाना प्रभारी पीयूष चार्ल्स, तहसीलदार जगदीश मेहरा और एसडीएम केएस सेन सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। डांगी को समझाइश दी, लेकिन वह मांगों पर अड़ा है। डांगी को मनाने कलेक्टर जीवी रश्मि अधिकारियों के साथ गांव पहुंची। पंचायत कार्यालय में उन्होंने ग्रामीणों से चर्चा कर जानकारी ली।
ग्रामीणों से डांगी को समझाइश देने की बात कही। इसके बाद उन्होंने डांगी की पत्नी फूलाबाई और बड़े बेटे ओमप्रकाश से बात की। समस्या सुनी तथा रामनिवास को समझाइश देने की बात कही। दो घंटे तक कलेक्टर ने पंचायत कार्यालय में रुककर चर्चा की। एसडीएम केएस सेन, एएसपी पंकज पांडे, जावद जनपद सीईओ अरविंद डामोर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

शुक्रवार सुबह से चढ़ा है टॉवर पर : गांव के विकास के लिए कई बार अनशन कर चुका रामनिवास डांगी शुक्रवार सुबह 7 बजे पुराने आंदोलन के दस्तावेज लेकर टावर पर चढ़ गया। वह करीब 70 फीट की ऊंचाई पर जाकर बैठ गया है। शुक्रवार को जब सुबह 10 बजे जब तहसीलदार जगदीश मेहरा पहुंचे तो दांगी ने उनके सामने मांग रखी कि गांव की अधूरी सड़क पूरी की जाए और मुख्यमंत्री गांव में आएं। तहसीलदार ने मौके पर कुछ कहा नहीं, बस इतना बोले की रणनीति बनाकर उसे नीचे उतार लिया जाएगा। इसके बाद उनकी सुरक्षा के लिए दो पुलिस जवान वहां तैनात कर दिए गए हैं। उसे लगातार नीचे उतारने की कोशिश की जा रही है पर वह अपनी मांग पर अडिग है।

तू यहां क्यों आई : कलेक्टर ने तहसीलदार जगदीश मेहरा काे डांगी की पत्नी फूलाबाई के साथ टावर के पास भेजा। पत्नी ने रामनिवास से नीचे उतरने की मिन्नतें की, लेकिन वह नहीं माना और कहा तू इन लोगों के बहकावे में क्यों आ रही है। यहां क्या लेने आई। समझाइश के बाद भी रामनिवास मांगों पर अड़ा रहा और टावर से नीचे नहीं उतरा।

पहले चढ़े थे पानी की टंकी पर : सालभर पहले रामनिवास डांगी गांव की अधूरी सड़क को लेकर पानी टंकी पर चढ़ा गया था। तब भी सड़क के साथ मांग थी कि कलेक्टर गांव आएं। तत्कालीन कलेक्टर विकास सिंह नरवाल गांव गए और सड़क का कार्य शुरू करवाया था। बाद में डांगी को प्रशासन ने रणनीति बनाकर उतारा और प्रकरण दर्ज कर जेल भेज दिया था। डांगी गांव विकास को लेकर कई बार अनशन कर चुका है।

पहले नाम अन्ना, फिर बोले वीरू : डांगी ने अन्ना के आंदोलन के दौरान गांव के विकास के लिए अनशन किया तो लोग सुवाखेड़ा का अन्ना कहने लगे। बाद में पानी की टंकी पर चढ़ा तो वीरू बोलना शुरू कर दिया।

टावर पर ही खाना-पीना : डांगी को टावर पर चढ़े हुए पांच दिन से ज्यादा हो गए हैं। वह टावर पर ही खा-पी और सो रहा है। गांव वाले उसे रस्सी की सहायता से सबकुछ उपलब्ध करवा रहे हैं। जब खाने या पीने का सामान लाया जाता है तो वह रस्सी नीचे फेंक देता है, गांववाले रस्सी में सामान बांध देते हैं, जिसे वह ऊपर खींच लेता है।

रामनिवास ने बताईं ये प्रमुख मांगे
>पंचायत भवन के आसपास जो अतिक्रमण हैं इसे हटवाया जाए।
> गांव में पहुंचने वाला मुख्य मार्ग जो अधूरा पड़ा है उसे पूरा किया जाए।
> खाखर बावजी के मंदिर तक और रामचंद्र पाटीदार के कुएं तक अतिक्रमण हटाया जाए।
> गांव में मुख्यमंत्री आएं या जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारी आकर समाधान का आश्वासन दें।

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