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एमवायएच कायाकल्प : अब तक २५०० चूहे मारे

7 वर्ष पहले
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एमवायएच में चूहों के बिलों में खाद्य सामग्री डालते टीम के सदस्य।
 
इंदौर. एमवाय अस्पताल के प्रोजेक्ट कायाकल्प के तहत शुक्रवार को चौथे दिन भी कॉलेज परिसर, एनसीसी ग्राउंड और चाचा नेहरू अस्पताल के आसपास चूहों के बिल में दवा डालने का काम किया जा रहा है। ओपन एरिया में जहरीली दवा मिली खाद्य सामग्री बिल में डाली जा रही है। सुबह तक 2500 से ज्यादा चूहे मारे जा चुके हैं। हालांकि कल दोपहर में डाली गई दवा का असर अभी तक पता नहीं चल पाया है। कर्मचारी चूहे ही नहीं गिन पाए है।  
 
लक्ष्मी फ्यूमीगेशन एंड पेस्ट कंट्रोल कंपनी के कर्मचारियों के अनुसार फिलहाल चूहों की गिनती जारी है। 8 नवंबर से अस्पताल के तलघर के चैंबर्स में दवा डालने का काम किया जाएगा। गौरतलब है कि  गुरुवार सुबह सीआरपी लाइन में एक गाय भी मृत पाई गई। जिसके बाद अफरा-तफरी मची। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि चूहों को मारने के लिए डाली गई दवा खाने से गाय की मौत हो गई हो। हालांकि कंपनी के अधिकारी इससे इंकार कर रहे हैं।

 ऐसे चल रहा अभियान
 1- खुराक तैयार की..: खाने के बिस्किट, मूंगफली दाने, सेव, मूंगफली तेल और एक क्विंटल गुड़, आलू बड़ा, कचौरी और जिंक फास्फेट का मिश्रण बनाया जा रहा है। खाने की सामग्री का मेनू बदला जा रहा है।  इस खुराक को अस्पताल परिसर कंटेनरों में भरकर रखा।
 2. चूहों को खाना परोसा : एमवायएच के मेन गेट के सामने के दोनों बगीचे के आसपास, व्हाइट चर्च से लेकर नई ओपीडी बिल्डिंग, एनसीसी ग्राउंड, कॉलेज परिसर  तक चूहों के बिल में तैयार मिश्रण डाला जा रहा है। 
 3. और ये असर : सुबह डाली गई खुराक के बाद शाम को कर्मचारी चूहों की गिनती करने उन्हीं स्थानों पर पहुंच रहे हैं जहां मिश्रण डाला गया था।   दोपहर बाद डाली गई दवा का देर रात पता लगेगा। दवा का असर तीन से चार घंटे में हो रहा है।
 
  रस्सी से नाकेबंदी की
 पेड़ की डालिया, कांटे वाली झाडिय़ां, रस्सी लेकर कॉलेज परिसर में अंदर आने के रास्तों को बंद किया जा रहा है। चाचा नेहरू अस्पताल के पास अस्थाई बाउंड्री वाल बनाई गई। अस्पताल के मेन गेट के सामने रस्सी से नाकेबंदी की गई।
 
  अभियान पर एक नजर
 - एमवायएच, चाचा नेहरू, कैंसर अस्पताल, टीबी अस्पताल के आसपास एरिया में 10 नवंबर तक
 - नई ओपीडी बिल्डिंग व एमवायएच चैंबर्स में 8 से 10 नवंबर तक
 - एमवायएच तलघर में 11 से 13 नवंबर।
 - कैंसर अस्पताल में 14 से 16 नवंबर।
 - एमवायएच पहली मंजिल से पांचवीं मंजिल तक 17 नवंबर से 3 दिसंबर तक।

 हर रोज अलग  खुराक 
 बुधवार को केमिकल के साथ मीठा मावा, झींगा मछली, सेव-परमल और खट्टा-मीठा मिक्चर, वनस्पति घी, धनिया पावडर मिलाकर मिश्रण तैयार होगा।
 गुरुवार को परमल, मूंगफली तेल, पोहा, समोसा, नमकीन मिक्चर, मावा, झींगा मछली के साथ केमिकल मिलाया जाएगा।

 खुराक में इसलिए बदलाव
 पेस्ट कंट्रोल का काम कर रही एजेंसी के सुनील पाल के अनुसार इस तरह के अभियानों में चूंकि पहले दिन बड़ी संख्या में चूहे मर जाते हैं इससे बाकी सतर्क हो जाते हैं और उनका सेंस इतना तेज होता है वे उसी गंध वाले खाद्य पदार्थों के पास नहीं जाते हैं। इसीलिए पेस्ट कंट्रोल के दौरान खाद्य सामग्री बदलना पड़ती है।

चूहों का खात्मा ऐसे 
 - चूहों के बिल चिह्नित कर लिए गए हैं। इनमें खाद्य सामग्री के साथ केमिकल मिला मिश्रण डाला जाएगा।
 - इसे खाते ही चूहे मर जाएंगे।
 - गड्ढों में सल्फॉस की गोलियां और सीमेंट व कांच का मिश्रण डाला जाएगा, ताकि कोई भी बच न पाए
 - फिर बाहर से मिट्टी डालकर बिल को भर दिया जाएगा और इस तरह चूहों का खात्मा हो जाएगा
 - आखिरी में अस्पताल को संक्रमण से मुक्त करने के लिए फ्यूमीगेशन होगा
 
 इस बार बाहर से अंदर करेंगे
 -वर्ष 1994 में जब एमवायएच में कायाकल्प अभियान चलाया गया था तब बिल्डिंग में अंदर से बाहर की ओर पेस्ट कंट्रोल किया गया था। इस बार ठीक उलट बाहर से काम शुरू कर अंदर तक किया जाएगा। पिछली बार करीब 12 हजार चूहे एकसाथ जलाए गए थे।
 - 10 हजार बिल चिह्नित किए गए हैं, चूहों के अस्पताल और मेडिकल कॉलेज परिसर में।
 - 35 कर्मचारियों की पांच टीमें काम में लगी हैं इनके खात्मे के लिए।
 - 56 लाख रुपए में दिया गया है पेस्ट कंट्रोल का ठेका।