जयासिंह, जिसकी हत्या के लिए मनोज को निचली अदालत ने दोषी माना था।
(भास्कर डॉट कॉम अपनी आेर से किसी पर कोई आरोप-प्रत्यारोप नहीं कर रहा है। हम केवल वही बता रहे हैं जो जया के परिजनों ने हमें बताया है।)
इंदाैर. सांघी कॉलोनी में खुद को गोली मारने वाली कोमल का पति मनोज गुप्ता जिस लड़की की हत्या के आरोप में निचली अदालत से दोषी करार देने के बाद हाई कोर्ट से बरी हो गया था, उस लड़की के परिवार को इस बात की कसक है कि वे बेटी के हत्यारे को सजा नहीं दिलवा पाए। दैनिक भास्कर डॉट.कॉम ने लड़की जया सिंह के परिवार को ढूंढ़कर उनसे बात की तो मां और भाई ने पूरी कहानी बताई कि किस तरह जया की हत्या हुई और फिर कैसे मनोज बरी हुआ। जया की मां और भाई ने अपना नाम नहीं छपाने का आग्रह किया है। जया की कहानी उसकी मां और भाई की जुबानी-
... हम पहले सांघी कॉलोनी में रहते थे। हमारे घर से लगा मनोज गुप्ता का भी घर था। वर्ष 1980 के दशक में दोनों न्यू लुक स्कूल (तब यह स्कूल एमजी रोड पर ट्रेजर आईलैंड के सामने था) में पढ़ते थे। जया कक्षा 11 में व मनोज कक्षा 10 वीं में था। वर्ष 1984 में जया ने स्कूल की पढ़ाई पूरी कर होलकर साइंस कॉलेज में प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया और मनोज न्यू लुक में ही रह गया। पास-पास रहने व एक ही स्कूल में पढ़ाई होने से दोनों में मित्रता थी। 18 सितंबर 1984। उस दिन गणेश चतुर्थी थी। जया घर पर यह कहकर गई थी कि मैं अपनी सहेली के यहां से कॉपी लेकर आती हूं, लेकिन फिर नहीं लौटी। हमने जया के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। मनोज भी हमारे घर आया और जया का ढूंढने में मदद करने लगा। इसी बीच उसके व्यवहार को लेकर हमें शंका हुई तो हमने पुलिस को बताया।
एमआईजी पुलिस ने शंका के आधार पर मनोज को हिरासत में लिया तो दो-तीन दिन बाद पूछताछ में उसने जयासिंह की हत्या करना कबूल कर लिया। पुलिस ने हमें जो घटनाक्रम बताया उसके मुताबिक मनोज जया को अपनी फिएट कार में यह कहकर ले गया कि वे मुंबई में शादी कर लेंगे। जया उसके झांसे में आ गई। ड्राइवर रामदीन की मदद से उसी की चुन्नी से गला रेत कर उसे मौत की नींद सुला दिया। शव मानपुर घाट पर ले जाकर पुलिया के नीचे फेंक दिया और पेट्रोल से जलाने के बाद सिर पर बड़ा पत्थर रख दिया था।
मनोज और उसका ड्राइवर दो साल तक जेल में रहे। अदालत ने पेरोल तक पर छोड़ने की इजाजत नहीं दी थी। दो वर्ष बाद निचली अदालत ने मनोज व रामदीन को उम्रकैद की सजा सुनाई। उसके बाद वह हाईकोर्ट से जमानत पर बाहर आए और बाद में हाई कोर्ट ने बरी कर दिया।