पत्नी सरस्वतीबाई और बेटे कालू के साथ बल्लू सिंह राजपूत।
इंदौर, खंडवा। इसी वर्ष नवंबर महीने में खंड़वा कोर्ट में तलाके के एक मामले की सुनवाई होनी थी। तलाक का कारण दंपति का बच्चा था। पिता का कहना था शादी के वक्त ही उसकी पत्नी के गर्भ में बच्चा था कि इस कारण वह उस बच्चे का पिता नहीं है। जबकि पत्नी इस बात पर अड़ी थी कि बच्चा उनका ही है। जज ने पति को गर्भकाल और जन्म की पूरी प्रक्रिया समझाई। फोन पर महिला रोग विशेषज्ञ से बात कराई। तब जाकर उसने बेटे को अपनाया। जज की कोशिश के बाद डेढ़ साल से चला आ रहा खत्म हो पाया।
एक ऐसा ही मामला और सामने आया, जिसमें दो मंदबुद्धि बच्चे होने पर पति ने पत्नी को प्रताड़ित करते हुए घर से जाने का कह दिया। 30 साल तक दोनों अलग रहे। दो महीने पहले पत्नी ने कोर्ट में भरण पोषण के लिए अर्जी लगाई थी। मामले को समझते हुए कोर्ट ने दोनों को दो महीने साथ रहने के आदेश दिए, इसके बाद फैसला लेने की बात कही। जज की पहल के बाद अब दोनों साथ रहने को तैयार हो गए हैं।
यह था मामला
भीकनगांव के पास सिवना की रहने वाली सरस्वती बाई का विवाह 40 साल पहले जगदीश पिता बल्लू सिंह राजपूत निवासी टेमी कला बगमार के साथ हुआ। दस साल के दरमियान सरस्वती बाई ने बेटे कालू और बेटी ज्योति को जन्म दिया। इत्तफाक से दोनों ही मंदबुद्धि थे। पति जगदीश निराश हो गया। वह पत्नी को प्रताड़ित करने लगा। उसके मन में यह बात घर गई कि तीसरी संतान भी कहीं मंदबुद्धि न हो जाए। उसने पत्नी से दूरी बना ली। दोनों के बीच आए दिन विवाद होने लगे। सरस्वती अपने दोनों बच्चों को लेकर मायके सिवना चली गई। वहां उसने बगैर तलाक लिए 30 साल गुजार दिए। भाइयों के खेत में मजदूरी की। उम्र से पहले ही बुढ़ापा आ गया।
अब जब हाथ-पैर जवाब देने लगे तो सरस्वती बाई (55) ने 3 दिसंबर 13 को कोर्ट की शरण ली। उसने मांग रखी कि या तो पति उसे अपने साथ रखे या भरण-पोषण दे। कोर्ट ने मध्यस्थता की। आखिरकार जगदीश पत्नी और बेटे को साथ रखने को राजी भी हो गया। कोर्ट ने प्रायोगिक तौर पर दो महीने के लिए दोनों को साथ रहने के आदेश दिए। दो महीने दोनों सुख से रहे। बुधवार को पति-पत्नी ने कोर्ट से कहा, अब हम साथ-साथ रहना चाहते हैं।
जज गंगाचरण दुबे ने दोनों में समझौता कराया जिसका आदेश 13 दिसंबर को लोक अदालत में होगा। समझौता कराने में वकील पुष्पा गौर और दिनेश
सोनी ने भी मध्यस्थता की। जज ने उनसे कहा- खेत में काम करते-करते दोनों के बाल पक गए। जवानी से बुढ़ापा आ गया। ३० साल से अलग हो। अब तो सुकून से जीवन बिताओ। लेकिन पत्नी को डर था कि पति ने तीस साल तक पलटकर नहीं देखा अब वह कैसे साथ रखेगा।
पति-पत्नी की अपनी-अपनी दलील
पति जगदीश का कहना था बेटा-बेटी दोनों ही मंदबुद्धि हैं, मैं और संतान पैदा कर उन्हें कष्ट नहीं देना चाहता था। इसलिए मैंने अलग ही रहने का फैसला किया था। अब लग रहा है इसमें पत्नी की क्या गलती है, इसलिए साथ रहने का निश्चय किया। इधर, पत्नी सरस्वीतबाई ने कहा मंदबुद्धि संतान होने में मेरा क्या कसूर था। अच्छा हुआ उन्हें अब समझ में गया।
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