सांकेतिक फोटो।
इंदौर. कॉलेजों की तमाम कोशिशों और एनसीटीई को पत्र लिखने के बाद भी सत्र 2015-16 के लिए बीएड और एमएड को जीरो ईयर ही रहेगा। इंदौर के कॉलेजों की कोर्ट जाने की धमकी को भी कोई खास असर नहीं हुआ है। यानी अगले सत्र में बीएड में एडमिशन नहीं हो पाएंगे। इतना ही नहीं एक साल के इस कोर्स को अब दो साल का किया जा रहा है। एमएड भी दो साल का होगा। एनसीटीई(नेशनल काउंसिल फॉर टीचर्स एजुकेशन) ने इस मामले में प्रक्रिया शुरू कर दी है। एनसीटीई के निर्देश पर बनाई गई वर्मा कमेटी की इन अनुशंसाओं को लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनाई गई कमेटी ने इसे लागू करने की बात कही है। अगर ऐसा हुआ तो अब शिक्षक बनना और मुश्किल हो जाएगा।
बड़े सुधार की गुंजाइश
- कमेटी ने कहा कि दो साल का कोर्स होने से क्वालिटी आएगी।
- कॉलेजों को नियमित कक्षाएं लगाना अनिवार्य होगा।
- नए सिरे से मान्यता के कारण वे सारे फर्जी कॉलेज बंद हो जाएंगे जो सालों से ऐसे ही चल रहे हैं।
बीएड में स्पेशलाइजेशन भी
नई व्यवस्था से बीएड में स्पेशलाइजेशन भी होगा। बीएड करने वाले केवल 30 फीसदी छात्र एजुकेशन फिल्ड में जा सकेंगे। बाकी सीटें अलग-अलग फिल्ड के लिए रहेंगी। किन-किन फिल्ड में स्पेशलाइजेशन होगा, यह अभी तय नहीं हो पाया है।
-45 बीएड कॉलेज
- 13 एमएड कॉलेज
-बीएड की4600 सीटें
- 300 सीटें एमएड की
चार साल का प्रोग्राम अलग से शुरू करना होगा
बीएड के लिए चार साल का इंटिग्रेटेड प्रोग्राम अलग से भी शुरू किया जा सकेगा। इसमें 12 वीं के बाद प्रवेश हो सकेंगे।