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देश की सबसे छोटी रेल जो देती है सबसे बड़ा घाटा, जानिए इसके बारे में

7 वर्ष पहले
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इंदौर-हबीबगंज के बीच चलने वाली डबल डेकर ट्रेन शुरुआत से ही किसी न किसी विवाद में रही है। कभी ट्रेन के प्लेटफॉर्म से टकराने, कभी इसके किराए, तो कभी इसके बंद किए जाने की अटकलों को लेकर रेलवे का यह सफेद हाथी सुर्खियां बटोरता रहा है। ताजा मामले में लोकसभा अध्यक्ष और इंदौर से सांसद सुमित्रा महाजन ने रेल मंत्री से मिलकर इस डबल डेकर ट्रेन को पश्चिम रेलवे को सौंपकर इसे इंदौर भोपाल की जगह इंदौर से फतेहाबाद और रतलाम के रास्ते सूरत या बडोदा तक चलाने की मांग की है। महाजन के सलाहकार नागेश नामजोशी की मानें तो इस रुट पर ट्रेन अधिक कमाई कर सकती है। भास्कर डॉट कॉम ने जब डबल डेकर ट्रेन की पड़ताल की तो कई चौंकाने वाल बातें सामने आईं।

इंदौर। आमतौर पर किसी भी ट्रेन मे इंजन के अलावा 8 से 10 डिब्बे होते है जो सवारियों को मंजिल तक पहुंचाते हैं पर एक ट्रेन ऐसी भी है जिसमें इंजन के अलावा सवारियों के लिए सिर्फ दो डिब्बे लगते हैं। इस डबल डेकर ट्रेन के दोनों ही डिब्बे एयरकंडीशंड हैं, मगर हैरानी की बात ये है कि इसमें गिनती के यात्री ही सवार होते हैं। देश की ये सबसे छोटी ट्रेन संभवतः रेलवे को सबसे बड़ा घाटा भी देती है।

सिर्फ दो सवारी डिब्बों के साथ ब्रॉड गेज पर चलने वाली देश की सबसे छोटी ट्रेन है भोपाल (हबीबगंज) से इंदौर के बीच चलने वाली डबल डेकर ट्रेन। इसमें दो सवारी डिब्बों के अलावा एक डिब्बा तकनीकी तामझाम का रहता है।
ये मध्यप्रदेश में चलने वाली पहली डबल डेकर ट्रेन है। इसकी शुरुआत भी पूरे 13 डिब्बों के साथ हुई थी, लेकिन भारत के रेल इतिहास की शायद ये एकमात्र ट्रेन है जिसके 11 डिब्बे एक साल पूरा होते-होते हटा दिए गए और अब ये ट्रेन सिर्फ दो डिब्बों के साथ चल रही है। दरअसल इस ट्रेन को कभी इतने यात्री ही नहीं मिले की यह अपने पूरे कोच के साथ चल सकें। रेलवे को उम्मीद थी कि ये ट्रेन सफलता के कीर्तिमान रचेगी मगर इसने नाकामी का रिकॉर्ड बना दिया।

सफेद हाथी साबित हो रही डबल डेकर
रेलवे के सूत्रों के मुताबिक एक साल मे हबीबगंज से इंदौर आने वाली अप ट्रेन मे कुल मिलाकर 58 लाख रुपए के टिकट बिके जबकि इस ट्रेन के संचालन पर लगभग 431 लाख रुपए का खर्चा हुआ। इसी तरह इंदौर से हबीबगंज जाने वाली डाउन ट्रेन मे एक साल मे कुल 89 लाख के टिकिट बिके जबकि खर्चा लगभग 469 लाख का हुआ। इस तरह ये डबल डेकर रेलवे के लिये सफेद हाथी साबित हो रही है। सामान्य ट्रेन की तुलना मे इसका संचालन खर्च ज़्यादा इसलिए भी है, क्योंकि ये एयरकंडीशंड है।

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