इंदौर. देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी की पीएचडी कोर्स वर्क परीक्षा में शोधार्थियों की कम उपस्थिति पर सख्ती दिखाने वाला प्रबंधन खुद नियम तोड़ रहा है। हालात यह है कि की विभागों में शोधार्थियों को शार्ट अटेंडेंस के नाम पर कोर्स वर्क की परीक्षा में ही नहीं बैठने दिया जा रहा।
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जबकि नियम तो खुद यूनिवर्सिटी प्रबंधन भी तोड़ रहा है। यूजीसी ने स्पष्ट गाइड लाइन दी है कि हर छह माह में पीएचडी की एक प्रवेश परीक्षा होना चाहिए। लेकिन प्रबंधन डेढ़ साल में भी नहीं करवा पा रहा। हाल ही में लाइफ साइंस विभाग के हेड ने 9 छात्रों को कोर्स वर्क की परीक्षा से बाहर कर दिया था, क्योंकि उनकी अटेंडेंस कुछ कम थी। इसलिए अब शोधार्थियों ने प्रबंधन को घेरा है और सवाल पूछा है।
दरअसल प्रवेश परीक्षा अगले साल जून से पहले नहीं हो पाएगी। यह स्थिति तब है जबकि लगभग सभी पीएचडी विभागों में पीएचडी कोर्स वर्क की परीक्षा या तो हो चुकी है या फिर दिसंबर में हो जाएगी। बावजूद इसके प्रबंधन नई प्रवेश परीक्षा को लेकर लेटलतीफी कर रहा है। हालांकि यूजीसी का स्पष्ट निर्देश है कि साल में दो बार पीएचडी प्रवेश परीक्षा करवाई जाए। जबकि डीएवीवी डेढ़ साल में एक बार परीक्षा करवा रही है। उसका कहना है कि अब तक सौ सीटें खाली होने की स्थिति नहीं है।
जबकि पहले प्रबंधन दावा कर रहा था कि परीक्षा जनवरी में ले ली जाएगी। फिर कहा गया था कि अप्रैल में होगी। लेकिन बाद में फिर पलट गई। अभी तो 150 सीटें खाली होने की भी जानकारी प्रबंधन को नहीं मिली है।