हजरत इमाम हुसैन की याद में जावरा स्थित हुसैन टेकरी पर मनाए जा रहे चैहल्लुम में उनके दीवानों ने उनकी याद में शरीर से खून बहाकर आस्था प्रकट की। सुन्नी समुदाय जहां इराक के कर्बला मैदान में हजरत इमाम हुसैन की हत्या को शहादत मानते हुए खुशी का पर्व मनाता है, वहीं शिया इसे मातम के रुप में मनाते हैं। मोहर्रम से 40वें दिन यह दस दिन चलने वाला कार्यक्रम शुरु होता है, इसलिए इसे चालीसवां या चैहल्लुम कहते हैं। इंदौर, जावरा। हुसैन टेकरी शरीफ पर मनाए जा रहे 132वें चैहल्लुम के दौरान तीन लाख से ज्यादा जायरीन आए और हजरत इमाम हुसैन के दरबार में सजदा किया। शुक्रवार दिनभर रोजों में जियारत की और रात 10 बजे शुरू हुए मुख्य आयोजन आग पर मातम के साक्षी बने।
हुसैनी मिशन के ड्रॉ में तय 21 दूल्हे (जायरीन) और फिर शिया महिला, पुरुष चूल से निकले। रात 11 बजे से अन्य जायरीनों के निकलने का दौर शुरू हुआ जो रातभर चला। दिन में शिया समुदाय ने खूनी मंजर पेश किया।
हुसैन के दीवानों ने उनकी याद में शरीर से खून बहाकर आस्था प्रकट की। शनिवार को मजलिस-ए-अलविदा के साथ चैहल्लुम का समापन होगा।
इससे पहले हुसैन टेकरी शरीफ पर 132वें चैहल्लुम में शुक्रवार को लाखों जायरीन उमड़े। चैहल्लुम के 10वें दिन सुबह 10 बजे हुसैनी मिशन मुंबई ने बड़े रोजे से बनी असअद के काफिले का मंजर पेश करते हुए जुलूस निकाला।
ये प्रमुख मार्ग से होकर टाप शरीफ रोजे पर खत्म हुआ। इसमें हुसैनी मिशन प्रमुख यूसुफ मुकादम समेत सैकड़ों महिला-पुरुष शामिल हुए और हुसैन की याद में मातम किया। दोपहर 12 बजे रोजा-ए-मेहंदी कुआं से अंजुमन-ए-
हैदरिया अल हिंद हैदराबाद ने जुलूस निकाला।
इसमें शामिल हुसैन के दीवानों ने खूनी मातम किया। जुलूस अब्बास अलमदार रोजे के पास पहुंचा। वहीं समापन हुआ।
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