इंदौर. देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी तक्षशिला परिसर के की विभागों के हेड तीन साल की समय-सीमा पूरी होने के बाद भी कुर्सी पर टिके हुए हैं। यह स्थिति तब है जब राजभवन और यूनिवर्सिटी कार्यपरिषद कह चुकी है कि किसी भी विभागाध्यक्ष को तीन साल से ज्यादा समय तक पद पर नहीं रहना चाहिए। हेड रोटेशन के तहत तत्काल अन्य प्रोफेसर को जिम्मेदारी सौंपा जाना चाहिए।
दरअसल इन दिनों विभागाध्यक्षों द्वारा छात्रों को परीक्षा से डिबार (वंचित) करने तथा पीएचडी कोर्स वर्क से बाहर करने पर बवाल मचा हुआ है। विभागाध्यक्षों की नियमों को लेकर छात्रों के प्रति सख्ती से खुद कुलपति और कुलसचिव नाराज हैं। इसीलिए भी सवाल उठ रहा है कि तीन साल से कुर्सी पर जमे विभागाध्यक्षों को बदला क्यों नहीं जा रहा है। डेढ़ साल पहले हेड रोटेशन प्रक्रिया के सख्ती से पालन को लेकर राजभवन के कड़े पत्र के बाद आधा दर्जन विभागाध्यक्षों को जरूर बदला गया था और तब कहा गया था कि बाकी विभागाध्यक्षों को नेक की टीम के दौरे के बाद बदला जाएगा। लेकिन जनवरी में नेक का दौरा भी हो गया। अब तक एक भी विभागाध्यक्ष को नहीं बदला गया है। यूनिवर्सिटी के की प्रोफेसर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर विभागाध्यक्ष के लिए उनका नंबर कब आएगा।
क्या ये नियम?
यूनिवर्सिटी अधिनियम 1973 की धारा 23 के तहत किसी भी विभाग के हेड को तीन साल में हटाना जरूरी है। सामान्य तौर पर इसके बदले में सिनियरिटी में दूसरे नंबर के प्रोफेसर को जिम्मेदारी दी जाती है। लेकिन यूनिवर्सिटी में न केवल वरिष्ठता को नजर अंदाज किया जा रहा बल्कि शिकायतों पर भी जांच नहीं हो रही।