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बस १० साल, ... और टाइटन ने कमाए १ लाख डॉलर से ११८ करोड़ सालाना

6 वर्ष पहले
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इंदौर। इंदौर मैनेजमेंट एसोसिएशन के काॅन्क्लेव में देश के काॅरपोरेट सेक्टर के कई दिग्गज मौजूद थे। इनमें राहुल बजाज जैसे बड़े उद्योगपति भी शामिल हुए। जिन्होंने अपनी काबिलियत से अपनी पैतृक कंपनी को एक नई पहचान देकर सफलता के शिखर पर खड़ा कर दिया। ऐसा ही एक और नाम भी कार्यक्रम में मौजूद था यह मशहूर शख्सियत कोई और नहीं भास्कर भट्ट थे। जब भट्ट ने टाइटन का दामन थामा तो वह अपने बुरे दौर से गुजर रही थी। भट्ट ने हालात से जूझ रही टाइटन कंपनी को नए सिरे से नई पहचान देने का बीड़ा उठाया। देखते ही देखते टाइटन देश-विदेश में छा गई। यह केवल भास्कर के दस साल की मेहनत का ही नतीजा रहा कि अब टाइटन 1 लाख डॉलर से 118 लाख डॉलर की सालाना कमाई तक पहुंच गई है।
भास्कर डाॅट काॅम ने भास्कर के साथ ही कुछ अन्य हस्तियों से चर्चा कर हरेक से ऐसे टिप्स लिए जो किसी भी युवा बिजनेस, मैनेजर, उद्यमी या स्टूडेंट को कामयाबी की राह दिखा सकती है।

जो भी करो जमकर करो : मुश्किल में चल रही किसी कंपनी की कमान संभाल कर दस साल में उसका मुनाफा 118 गुना बढ़ा देना कोई मामूली काम नहीं है। टाटा समूह की टाइटन इंडस्ट्रीज के एमडी भास्कर भट्ट ऐसा करिश्मा कर चुके हैं। जिस समय उन्होंने टाइटन की कमान संभाली थी, तब टाइटन का मुनाफा लगभग 1 लाख डालर का था, जिसे बढ़ाकर उन्होंने 118 लाख डालर तक पहुंचा दिया। भास्कर कहते हैं मेरे लिए सफलता का मंत्र है, जो भी करो जमकर करो।

भास्कर ने कहा कि बिजनेस में या कंपनी में आपके सामने जो भी लक्ष्य हो उसे पाने में जुट जाना चाहिए। अपनी स्ट्रेटेज़ी तय कर जो भी किया जाए उसे पूरे मन से करना चाहिए। अधूरे मन से कोई काम पूरा नहीं किया जा सकता। भास्कर कहते हैं कि मैं अपने जूनियर मैनेजर्स से कहता हूं कि यदि वह पार्टी भी करें तो भी पूरे मन से करें और जमकर मस्ती भी करें। कामयाबी हासिल करने के लिए ज़रूरी है कि आप कोई कसर ना छोडे़ं, बस यदि आपने यह कर लिया तो आपको कामयाब होने से कोई नहीं रोक सकता।

60 फीसदी हिस्सेदारी : भारत की घड़ी कंपनी टाइटन ने अकेले ही भारतीय मार्केट में कब्जा जमाया है। टाइटन अकेले ही भारतीय मार्केट लीडर के तौर पर मौजूद है। इसमें उसकी सेल्स की हिस्सेदारी 60 फीसदी तक है। यही नहीं इस भारतीय कंपनी ने अपनी पहचान विश्व के 32 देशों में बनाई हुई है। घड़ी के अलावा टाइटन ज्वैलरी, फैशन एसेसरीज और दूसरे कई सेगमेंट में अपने प्रोडक्ट्स उतार चुकी है। यूरोप में टाइटन का अनुभव भले ही ठीक नहीं रहा हो, लेकिन उसने मिडिल-ईस्ट के कई देशों में अपना नाम एलीट क्लास ब्रांड के रूप में स्थापित किया है।

आगे की स्लाइड पर नरूरकर के मंत्र :