इंदौर। इस इलाके में नए आए हो साहब! वरना शेर खां को कौन नहीं जानता।' बॉलीवुड के सीनियर मोस्ट एक्टर प्राण अपनी खनकदार आवाज़ और रौबीले अंदाज़ में यह संवाद कुछ इस तरह कह गए कि आज भी इसे सुनकर बदन में बिजली-सी दौड़ जाए। आंखें जैसे धमका रही हैं, भौंहें तनी हैं और होठों पर हल्की-सी मुस्कराहट है। जैसे दुश्मन पर तरस खा रहे हों। हिंदी सिनेमा की बेहतरीन 400 फिल्मों की रीलों में कैद है प्राण की ऐसी ही अदाकारी।
ये प्राण की अदाकारी का जलवा ही था कि 70 और 80 के दशक में बतौर फीस उन्हें फिल्म के हीरो से ज्यादा पैसे मिलते थे। प्राण का जन्म 12 फरवरी 1920 को दिल्ली में लाला केवलकृष्ण सिकंद के घर हुआ था। प्राण का मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश से खासा लगाव था। उनकी शिक्षा-दीक्षा पंजाब के कपूरथला के अलावा उत्तर प्रदेश के उन्नाव, मेरठ व रामपुर, उत्तराखंड के देहरादून और मध्यप्रदेश में हुई थी।
इंदौर शहर के लिए यह फख्र की बात है कि अदाकारी के प्राण इंदौर में भी रहे हैं। लालगली में खातीपुरा की ओर एक फोटो स्टूडियो में शहर के एक फोटोग्राफर के साथ वे भी काम किया करते थे। वे 1948 से 1950 के बीच इंदौर में रहे। उनका परिवार करीब छह साल इंदौर में रहा। भास्कर डॉट कॉम ने उनकी बेटी पिंकी सिकंद (भल्ला), सहयोगी गोपाल और शहर के वरिष्ठ कलाकार नाना दुराफे से जाना प्राण का शहर से राब्ता।
93 साल में हुआ निधन : प्राण साहब ने 1945 में शुक्ला आलूवालिया से शादी की। उनके तीन (दो बेटे,एक बेटी) बच्चे हैं। 93 साल की उम्र में लंबी बीमारी के चलते 12 जुलाई, 2013 को उनका निधन हो गया था।
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