इंदौर। मंगलवार सुबह इंदौर में एक शख्स ने मौत के बाद 3 लोगों को नई जिंदगी दी। इसके लिए शहर में पांचवी बार ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया । महिदपुर निवासी विश्वास दोशी की ब्रेन डेथ के बाद उनका लीवर दिल्ली के एक व्यक्ति को जबकि किडनी इंदौर के दो व्यक्तियों को लगाई जाएगी। स्किन और आंखे भी चोइथराम अस्पताल में रखी गई हैं। मरकर भी दिया जीवन का विश्वास...
विश्वास दोशी (40) पिछले 2 साल से हार्ट की बीमारी से पीड़ित थे। उनका मेदांता अस्पताल में इलाज चल रहा था। सोमवार शाम डॉक्टर्स ने उन्हें ब्रेन-डेड घोषित कर दिया। इसके बाद परिजनों ने अंगदान की इच्छा जताई। इस पर विश्वास की बॉडी को चोइथराम हॉस्पिटल ले जाकर अंग निकालने की व्यवस्था की गई।
फिर बने दो कॉरीडोर
विश्वास के ब्लड ग्रुप के आधार पर दिल्ली में लीवर ट्रांसप्लांटेशन का एक पेशेंट और इंदौर में किडनी के दो पेशेंट मिले। सुबह चोइथराम अस्पताल से एयरपोर्ट और ग्रेटर कैलाश नर्सिंग होम के लिए दो ग्रीन कॉरीडोर बनाए गए। मेदांता हॉस्पिटल दिल्ली की टीम मंगलवार सुबह लीवर लेकर दिल्ली लेकर गई। एक किडनी ग्रेटर कैलाश पहुंचाई गई। जबकि दूसरी किडनी चोइथराम में ही एक मरीज को ट्रांसप्लांट की गई।
क्या होता है ग्रीन कॉरीडोर
ग्रीन कॉरीडोर का मतलब एक ऐसी व्यवस्था करने से है जिसमें हार्ट, लीवर या किडनी जैसे ऑर्गन ले जा रही या किसी गंभीर मरीज को ले जा रही एंबुलेंस को बिना ट्रेफिक जाम के कम से कम समय में एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जाता है।
- ग्रीन कॉरीडोर के लिए प्रशासन पहले अस्पताल से एयरपोर्ट या संबंधित अस्पताल तक का रोड मैप बनाता है।
- पुलिस उस पूरे रूट को खाली करवाती है, जिसमें से एम्बुलेंस को गुजरना होता है।
- एम्बुलेंस के आगे पुलिस की गाड़ी चलती है, ताकि उसकी स्पीड में कोई ब्रेक न लगे, इसलिए इस प्रक्रिया को "ग्रीन कॉरिडोर" नाम दिया गया है।
- यदि फ्लाइट के जरिए उस ऑर्गन को ले जाया जाता है तो एअरपोर्ट अथॉरिटी को भी मदद के लिए कहा जाता है।
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