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भारत-पाक सीमा से जैसी संवेदनशील हुई यह जगह, देखें ४८ घंटे पहले यहां के हालात

5 वर्ष पहले
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इंदौर/धार। वसंत पंचमी (12फरवरी) पर मप्र के धार में भोजशाला पर पूजा और नमाज एक साथ कराना मप्र सरकार के लिए के बड़ा सिरदर्द बन गया है। दिनभर पूजा को लेकर आरएसएस के कड़े तेवर ने सरकार की चिंता और बढ़ा दी है। इस समस्या से निकलने के लिए सीएम शिवराजसिंह चौहान के मंत्री नरोत्तम मिश्र यहां डाले हुए हैं और दोनों ही पक्षों को साधने में लगे हु हैं।


इसलिए चिंतित है सरकार ...
आरएसएस ने भाजपा के संगठन महामंत्री अरविंद मेनन के जरिए प्रदेश सरकार को दो टूक संदेश दिया है कि पूजा खंडित नहीं होना चाहिए।
- संघ की नसीहत मिलने के बाद मेनन ने जिले के प्रभारी मंत्री नरोत्तम मिश्रा को धार तलब किया और बंद कमरे में लंबी चर्चा की।
- इसके बाद दोनों मंत्री भोज उत्सव समिति संरक्षक विजयसिंह राठौर और पदाधिकारियों से मिले लेकिन उन्होंने पूजा का कार्यक्रम बदलने से मना कर दिया नहीं बदलेगा।
- सरकार दोनों पक्षों से बात कर कोर्ट और पुरातत्व विभाग द्वारा दिए निर्देश अनुसार कार्यक्रम करवाना की कोशिश में लगा है, लेकिन दोनों पक्ष इसके लिए राजी नहीं।


विवाद की वजह...
- एक ही जगह पर मस्जिद और मंदिर होने से परिसर में पूजा और नमाज दोनों होती है। लेकिन इस बार शुक्रवार को वसंत पंचमी है और नमाज भी होना है, इसलिए यह विवाद बढ़ गया है। हिंदू समाज पूरे दिन पूजा करना चाहता है तो मुस्लिम समाज नमाज अदा करना चाहता है।
 

 
अभी ऐसा है शेड्यूल...
12 फरवरी को वसंत पंचमी पर भोजशाला में सुबह से दोपहर 12 बजे तक पूजा करवाई जाएगी। 1 से 3 बजे तक नमाज की अनुमति दी गई है। 3 बजे के बाद फिर से पूजा की जा सकेगी। हिन्दू समाज पूरे दिन पूजा के लिए तो मुस्लिम समाज दोपहर में नमाज के लिए अड़ा हुआ है।


भोजशाला का इतिहास...
- राजा भोज देवी सरस्वती के उपासक थे।
- उन्होंने धार में 1034 ई. में भोजशाला के रूप में एक भव्य पाठशाला बनवाकर उनकी प्रतिमा स्थापित की।
- कुछ इतिहासकारों के मुताबिक 1305 ई. में अलाउद्दीन खिलजी ने भोजशाला को ध्वस्त कर दिया।
- बाद में दिलावर खां गौरी ने 1401 ई. में भोजशाला के एक भाग में मस्जिद बनवा दी।
- 1514 ई. में महमूद शाह खिलजी ने शेष भाग पर भी मस्जिद बनवा दी।
- धार रियासत ने 1909 में धार दरबार के गजट में भोजशाला को संरक्षित स्मारक घोषित किया और यह पुरात्तव विभाग के अधीन हो गई। 1935 में परिसर में नमाज की अनुमति दी गई।
- भोजशाला पर विवाद की शुरुआत 1995 में हुई। उस दौरान मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज पढऩे की अनुमति दी गई।
- 1997 में कलेक्टर ने भोजशाला में आम लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। 
- 1999 में केंद्रीय पुरातत्व विभाग ने आगामी आदेश तक प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया।
- 2003 में मंगलवार को फिर पूजा करने की अनुमति दी। 
-  शुक्रवार को वसंत पंचमी होने पर 2003 को भोजशाला परिसर में सांप्रदायिक तनाव के बाद हिंसा फैली थी।
- 2006 में यहीं स्थित बनी।
- 2013 को भी शुक्रवार को वसंत पंचमी आने से विवाद की स्थिति बनी थी।
 
2006 में साथ-साथ हुई थी पूजा और नमाज

भोज उत्सव समिति ने हर बार की तरह इस बार भी पूजा का कार्यक्रम सूर्योदय से सूर्यास्त तक का जारी किया है। वर्ष 2013 में प्रशासन ने पुरातत्व विभाग द्वारा जारी किए गए कार्यक्रम के तहत सख्ती दिखाकर एक बजे पूजा बंद करवा दी थी, लेकिन वर्ष 2006 की वसंत पंचमी पर पूजा और नमाज साथ-साथ हुई थी। हालांकि बाद में असामाजिक तत्वों ने उत्पात मचाने की कोशिश की थी, लेकिन इस बार प्रशासन ज्यादा अलर्ट है। ऐसे में सरकार को लगता है कि 2006 के फार्मूले के तहत पूजा और नमाज शांति से पूरी करवाई जा सकती है।





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