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डाउनलोड करेंइंदौर। 20 अक्टूबर 1962 का वह दिन आजाद भारत के राजनीतिक और सामरिक नेतृत्व के लिए कभी न मिटने वाला वो काला दाग लेकर आया था, जिसे याद कर आज भी हमारा सिर शर्म से झुक जाता है। इस युद्ध को 53 साल हो चुके हैं, लेकिन युद्ध से उपजे विषाद ने इंदौर के पास बडऩगर नाम के एक छोटे से कस्बे के रहने वाले और उस समय मुंबई में फिल्मों के लिए गाने लिखने वाले कवि प्रदीप को कालजयी रचना लिखने की प्रेरणा दी, जो आज भी देशभक्ति गीतों के मामले में हमारे देश का नंबर वन गीत है।
जी हां हम बात कर रहे हैं कवि प्रदीप के लिखे, सी रामचंद्र द्वारा संगीत से सजाए गए और लता मंगेशकर की आवाज में अमर हो चुके गीत ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी, जो शहीद हुए हैं उनकी, जरा याद करो कुर्बानी की। इस गीत की रचना को इस वर्ष 51 साल हो चुके हैं और हम यहां आपको बताने जा रहे हैं इस गीत की रचना से जुड़े रोचक संस्मरण के बारे में। इस गीत को आज मुंबई में आयोजित स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में एक लाख लोग एकसाथ गाएंगे।
आगे की स्लाइड पर क्लिक कर पढि़ए गीत की रचना और कवि प्रदीप के बारे में..........
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