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डाउनलोड करेंइंदौर. पिछले कुछ सालों में साइबर क्राइम में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। एक सर्वे के मुताबिक दुनिया में हर सेकंड 14 लोग, रोज 10 लाख लोग और हर साल 43 करोड़ लोग साइबर क्राइम का शिकार हो रहे हैं। विश्व में इससे होने वाले नुकसान का आंकड़ा करीब 20 लाख करोड़ का है। अकेले भारत में हर साल साइबर क्राइम से पांच हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है।
यह बात पुलिस रेडियो ट्रेनिंग स्कूल (पीआरटीएस) के डायरेक्टर व आईजी वरुण कपूर ने कही। वे पीआरटीएस में स्कूली बच्चों को साइबर क्राइम के प्रति जागरूक करने के लिए चलाए जा रहे 'संदेशÓ अभियान के तहत सत्य सांई विद्या विहार स्कूल, इंदौर के 130 छात्र-छात्राओं एवं फेकल्टी मेंबर्स यहां उपस्थित थे। आईजी ने कहा कि आर्थिक नुकसान की दृष्टि से मादक पदार्थों से जुड़े अपराध पहले स्थान पर हैं, वहीं साइबर क्राइम दूसरे स्थान पर। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों से जुड़े अपराध 500 सालों से ज्यादा पुराने हैं, जबकि साइबर क्राइम कुछ साल पुराना होने के बाद भी दूसरे स्थान पर पहुंच गया है, जो इसकी गंभीरता को बताता है कि यह कितनी तेजी से बढ़ रहा है।
80 प्रतिशत भारतीय साइबर क्राइम के शिकार -
आईजी कपूर ने बताया कि साइबर क्राइम एक अंतरराष्ट्रीय समस्या है। इससे विश्व के सभी देश लड़ रहे हैं। इससे सर्वाधिक प्रभावित देशों में भारत चौथे स्थान पर है, जहां 84 प्रतिशत लोग इसके जाने-अनजाने शिकार बन जाते हैं। इसके बाद भी यहां लोगों में इसके प्रति जागरूकता कम होने के कारण रिपोर्ट दर्ज होने के मामले में भारत 11वें स्थान पर है। एक सर्वे के मुताबिक 1 करोड़ हवाई यात्रियों में से एक प्लेन क्रैश का शिकार होता है। इसी तरह 6279 में से एक वाहन दुर्घटना का शिकार होता है। जबकि 2.27 लोगों में से एक साइबर क्राइम का शिकार बनता है। इस तरह इससे प्रभावित होने वाले लोग सबसे ज्यादा हैं। उन्होंने अपने उद्बोधन में विद्यार्थियों को साइबर क्राइम के खतरों और उससे बचने के बारे में भी जानकारी दी। साथ ही मादक पदार्थों के भी दुष्परिणामों की जानकारी दी।
सिक्रेट लाइन से बनाए पासवर्ड -
इस प्रशिक्षण में डीएसपी सुदीप गोयनका ने विद्यार्थियों को बताया कि कम्प्युटर या मोबाइल या इस पर इंटरनेट का इस्तेमाल करते हुए सुरक्षा के लिए जरूरी है आप पासवर्ड डालें। ये पासवर्ड ऐसे होने चाहिए जिसे आसानी से पता नहीं किया जा सकता हो, ना ही इसे कहीं लिखें। उन्होंने इसके लिए एक ट्रिक भी बताई। जिसमें आपकी पसंदीदा एक वाक्य या पंक्ति आप चुनें उसमें आने वाले शब्दों के पहले अक्षर को ले लें। इसके बाद जिस भी वेबसाइट का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसका नाम फिर अपना पसंदीदा अक्षर और नंबर लें। इसका क्रम आगे या पीछे भी कर सकते हैं। ऐसा करने पर एक ही जैसे पासवर्ड अलग-अलग साइट के लिए तैयार हो जाएंगे। उक्त वाक्य को आप लिखकर भी रखें तो भी उसे कोई समझ नहीं पाएगा। इस तरह से आपको एक आसानी से याद रहने वाला और सुरक्षित पासवर्ड मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक, आरकुट या वाट्स एप आदी पर कभी भी अपनी निजी जानकारियां शेयर ना करें। वहीं किसी भी आपत्तिजनक पोस्ट को ना तो डालें, ना फारवर्ड करें ना शेयर ना लाइक करें। क्योंकि यह अपराध की श्रेणी में आता है।
एंटी वायरस के नाम पर आ जाते हैं वायरस -
डीएसपी गोयनका ने बताया कि कई बार इंटरनेट का इस्तेमाल करते हुए आपकी स्क्रीन पर लिखा आता है कि आपके कम्प्यूटर में वायरस है, इसे दूर करने के लिए यहां क्लिक करें। इस तरह से कई लोग एंटी वायरस के नाम पर वायरस पहुंचा देते हैं। इसलिए ऐसे पाप-अप से बचें। वहीं ई-मेल पर आने वाली लिंक को भी एक्सेस ना करें। किसी भी साइबर कैफे पर फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन ना करें। साइबर कैफे में अपने पासवर्ड आदी जानकारियां सेव ना करें।
सभी विद्यार्थी बोले हम करते हैं इंटरनेट का इस्तेमाल -
प्रशिक्षण के दौरान आईजी ने विद्यार्थियों से पूछा कि आप में से कितने इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। तो सभी ने कहा कि वे इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। इस पर उन्होंने कहा कि यह अच्छा भी है और जानकारी के अभाव में खतरनाक भी। आईजी ने सर्वाधिक सक्रिय रहे दो विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया।
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