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ये है श्री ग्यारह रुद्री महादेव, भगवान कृष्ण ने पांडवों के लिए की थी स्थापना

6 वर्ष पहले
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पानीपत/कैथल। सावन के इस पवित्र महीने में भगवान शिव के मंदिरों में भक्तों की भीड़ जुट रही है। ऐसे में हरियाणा के कैथल जिले में स्थित श्री ग्यारह रुद्री महादेव मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। क्योंकि इस प्राचीन मंदिर को महाभारत के युद्ध के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों के लिए स्थापित किया था। भगवान श्रीकृष्ण ने यहां श्री ग्यारह रुद्रों की स्थापना करवाकर पांडवों से पूजा कराई थी। इस श्री ग्यारह रुद्री मंदिर में प्रतिदिन हजारों लोग पूजा-अर्चना करने के लिए आते हैं।
कौरवों की मौत के बाद अशांत पांडवों के लिए की गई थी इसकी स्थापना
बताते हैं महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपने परिजन कौरवों की मौत के बाद अशांत हो गए थे। उन्हें शांति नहीं मिल रही थी। उसी दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने कैथल में श्री ग्यारह रुद्र व नव कुंडों की स्थापना करवा पांडवों की पूजा करवाई थी। महाभारत काल से ही इस मंदिर में श्री ग्यारह रुद्रों की पूजा हो रही है। मंदिर का अब विस्तार काफी बढ़ गया है। लेकिन प्राचीन मंदिर ज्यों का त्यों है।
कई बार हुआ जीर्णोद्धार
इस मंदिर का कई बार जीर्णोद्धार हो चुका है। कैथल के अंतिम शासक भाई उदय ने भी मंदिर और तालाब का जीर्णोद्धार कराया था। अब मंदिर कमेटी इसकी देखरेख कर रही है। मंदिर में नवग्रह मंदिर भी है। जहां नौ ग्रह स्थापित किए गए हैं।
कुरुक्षेत्र की पौराणिक सीमा 48 कोस में आता है ये मंदिर
छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध ये मंदिर महाभारत के समय कुरुक्षेत्र की पौराणिक सीमा 48 कोस के क्षेत्र में आता है। इस सीमा में मौजूदा समय के कुरुक्षेत्र जिले के साथ-साथ पानीपत, करनाल, कैथल और जींद जिले आते हैं। महाभारत के युद्ध के समय कुरुक्षेत्र इसी 48 कोस के दायरे में फैला हुआ था।
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