पानीपत। जेबीटी भर्ती घोटाले में सजा काट रहे पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला और उनके पुत्र अजय चौटाला की पुनर्विचार याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई होगी। बता दें कि चौटाला पिता-पुत्र इस घोटाले में 10 साल की सजा काट रहे हैं और ओपी चौटाला फिलहाल 4 सप्ताह की पैराेल पर चल रहे हैं।
चौटाला के सीएम रहते हुआ था घोटाला उजागर
इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने उनके साथ-साथ अन्य तीन लोगों की सजा भी बरकरार रखी थी। इस मामले में सजा काट रहे 50 लोगों को राहत देते हुए उनकी सजा 2 साल कर दी गई थी। सजा मिलने के बाद चौटाला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने राहत न देते हुए निचली अदालत जाने के लिए कहा था। इसके बाद अब पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई होगी।
गौरतलब है कि जेबीटी टीचर भर्ती मामला हरियाणा का सबसे चर्चित मामला है। दरअसल, जब इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ उस समय इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के नेता ओम प्रकाश चौटाला सीएम थे और शिकायत के बाद उनके सीएम रहते ही सीबीआई ने इस मामले की जांच शुरू कर दी थी। इस मामले का खुलासा एक सीनियर आईएस अधिकारी संजीव कुमार ने किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि जेबीटी टीचर भर्ती मामले में भारी अनियमितताएं हुई हैं। उनके आरोप के बाद सीबीआई जांच के बाद निचली अदालत में उन्हें दोषी माना था और जेबीटी अध्यापक भर्ती घोटाला मामले में दोषी साबित होने के बाद दस साल की सजा सुनाई गई थी।
ये था जेबीटी प्रकरण
- नवंबर 1999 में 3206 शिक्षक पदों का विज्ञापन जारी हुआ।
- अप्रैल 2000 में रजनी शेखर सिब्बल को प्राथमिक शिक्षा निदेशक नियुक्त किया गया।
- जुलाई 2000 में रजनी शेखर को पद से हटाकर संजीव कुमार को निदेशक बनाया गया।
- दिसंबर 2000 में भर्ती प्रक्रिया पूरी हुई और 18 जिलों में जेबीटी शिक्षक नियुक्त हुए।
- जून 2003 में संजीव कुमार इस मामले में धांधली होने का हवाला देकर मामले को सुप्रीम कोर्ट ले गए।
- नवंबर 2003 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को जांच करने के आदेश दिए।
- मई 2004 में सीबीआई ने जांच शुरू की।
- फरवरी 2005 में संजीव कुमार से पूछताछ. हुई।
- जून 2008 में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल।
- जुलाई 2011 में सभी आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम कर दिए गए।
- दिसंबर 2012 में केस की सुनवाई पूरी हुई।
- 16 जनवरी 2013 को ओमप्रकाश चौटाला और उनके पुत्र अजय चौटाला समेत 55 दोषी करार दिए गए।
- 22 जनवरी को 10-10 साल की सजा सुनाई गई।
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