पानीपत। 14 फरवरी को देश की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का जन्मदिन है। सुषमा स्वराज और उनके पति स्वराज कौशल के बारे में कई ऐसी बातें हैं, जो बहुत कम लोगों को मालूम है। dainikbhaskar.com आपको बताने जा रहा है सुषमा स्वराज और उनके पति स्वराज कौशल के बारे में।
दोनों पति-पत्नी है रिकॉर्डधारी
स्वराज कौशल के नाम भारत का सबसे युवा राज्यपाल बनने का रिकॉर्ड है। साल 1990 में महज 37 साल की उम्र में उन्हें मिजोरम का राज्यपाल बनाया गया था। वह 9 फरवरी 1993 तक राज्यपाल रहे। वहीं उनकी पत्नी सुषमा स्वराज के नाम देश की सबसे युवा कैबिनेट मंत्री बनने का रिकॉर्ड है।
कौन है स्वराज कौशल
स्वराज कौशल सुप्रीम कोर्ट के क्रिमिनल मामलों के वकील हैं। वे राजधानी के पेज थ्री सर्किल से हमेशा दूर रहते हैं। वह देश की प्रमुख पार्टी 'भाजपा' (भारतीय जनता पार्टी) की शीर्ष महिला नेत्री सुषमा स्वराज के पति हैं। हालांकि, उनकी पत्नी भाजपा की बड़ी नेता हैं, पर वे भाजपा से कोई लेना-देना नहीं रखते। कौशल महज 37 साल की उम्र में मिजोरम के गवर्नर बन गए थे। इतनी छोटी उम्र में कभी कोई किसी प्रदेश का गवर्नर नहीं बना। उनकी इस उपलब्धि ने उन्हें और भी खास बनाया है।
देश के एडवोकेट जनरल भी रह चुके हैं कौशल
उन्होंने ही पृथकतावादी मिजोरम और केन्द्र के बीच समझौता करवाने में अहम भूमिका निभाई थी वे समाजवादी पृष्ठभूमि से आते हैं स्वराज कौशल साल 2000 में राज्यसभा के सदस्य भी थे। कौशल काफी अध्ययनशील व्यक्ति भी हैं। इमरजेंसी के दिनों में उन्होंने जॉर्ज फर्नांडीस के पक्ष में बड़ौदा डायनामाइट केस में मुकदमा लड़ा था। वे देश के एडवोकेट जनरल भी रहे। वे संगीत में भी दिलचस्पी लेते हैं।
कुशल राजनीतिज्ञ
भारत की राजनीति में स्वराज कौशल को एक बेहतर राजनीतिज्ञ के रूप में जाना जाता है। कौशल हरियाणा से छ: साल तक राज्यसभा में सांसद रहे। वे मिजोरम में राज्यपाल भी रह चुके हैं। वे सबसे कम आयु में राज्यपाल बनने वाले व्यक्ति हैं। 13 जुलाई, सन 1975 को उनका विवाह सुषमा स्वराज के साथ संपन्न हुआ था। स्वराज कौशल और सुषमा स्वराज की उपलब्धियों का स्वर्णिम रिकॉर्ड 'लिम्का बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड' में दर्ज हो चुका है।
स्वराज दंपत्ति को एक ही संतान
स्वराज दंपत्ति एक बेटी के माता-पिता भी हैं, जिसका नाम बांसुरी स्वराज है। बांसुरी स्वराज वकालत करती हैं और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की छात्रा रही हैं। सुषमा स्वराज शुरू से ही राजनीतिक जीवन में सक्रिय रहीं। स्वराज कौशल भी पहले सार्वजनिक जीवन में थे और पूर्वोत्तर में राज्यपाल भी रहे, लेकिन बाद में सुषमा आगे बढ़ती गई और कौशल जी ने खुद को अपने परिवार और कामकाज तक सीमित कर लिया।
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