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जाट आरक्षण: कैबिनेट मंत्री धनखड़ ने मनाया जाटों को, रेल ट्रैक से उठेगा धरना

5 वर्ष पहले
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हिसार। जाट आरक्षण की मांग को लेकर हिसार-भिवानी रेलट्रैक पर बैठे जाट समुदाय के लोग दो धड़ों में बंटे नजर आए। शनिवार रात कैबिनेट मंत्री ओपी धनखड़ के भरोसे के बाद जाट नेता कैप्टन हवा सिंह सांगवान ने रविवार दोपहर धरना खत्म करने का ऐलान किया था। बावजूद इसके आधे लोग धरना खत्म करने को राजी नहीं थे, बाद में करीब 3 बजे आखिर जाम खुल ही गया। ट्रेंने बहाल हुई।
और राज्यों में मिला तो यहां भी मिलेगा आरक्षण
- दरअसल केंद्रीय और राज्य स्तर पर रद्द हो चुकी जाट आरक्षण की मांग को लेकर जाट यमुदाय के लोग आंदोलनरत हैं। शनिवार को कैबिनेट मंत्री ओपी धनखड़ ने आश्वासन दिया है कि अगर बाकी 8 राज्यों में जाटों को आरक्षण लाभ मिला तो हरियाणा में भी मिलेगा।
- बीते दिनों जाट नेताओं ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्‌टर से मुलाकात की और इस दौरान सीएम ने 4 सदस्यीय एक कमेटी गठित कर 31 मार्च तक इस मसले पर रिपोर्ट देने की बात कही।
- बावजूद इसके हिसार के गांव मय्यड़ में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के नेता कैप्टन हवा सिंह सांगवान गुट के लोग शुक्रवार शाम को हिसार-भिवानी रेल ट्रैक पर धरने पर बैठ गए थे।
यह थी शर्त, कोई दो जाट नेता आएं और बात करें
- शनिवार को डीसी डॉ. चंद्रशेखर खरे ने स्पेशल गाड़ी से जाट नेताओं को बुलाया। सांगवान की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल ने डीसी को सीएम के नाम ज्ञापन दिया और शर्त रखी थी कि 4 जाट नेताओं (केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह, प्रदेश के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, कृषि मंत्री ओपी धनखड़ व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला) में से दो नेता विश्वास दिलाएं कि जाटों को पिछड़ी जाति में शामिल किया जाएगा।
इस तरह बिगड़ी सुलझती हुई बात
- शनिवार को वार्ता के लिए हांसी रेस्ट हाउस पहुंचे कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने तीन बार जाट नेताओं से बात की।
- तीसरे दौर में बात कुछ बनती नजर आई थी, क्योंकि मंत्री आश्वासन दिया था कि अन्य राज्यों में आरक्षण मिला तो हरियाणा के जाटों को भी केंद्र में कोटा मिलेगा।
- इसके बाद रविवार को दोपहर कैप्टन हवा सिंह सांगवान ने रेल ट्रैक पर दिया जा रहा धरना खत्म करने का ऐलान किया।
- दूसरी तरफ जब वह धरनास्थल पर पहुंचे तो यहां जाट आंदोलन दो गुटों में बंट गया।
- धरने पर बैठे करीब 250 लोगों में से 100 के लगभग ने कैप्टन की बात मान ली, लेकिन बाकी ट्रैक से उठने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि इसी तरह ट्रेनें रुकी रहेगी।
- यह बात भी उल्लेखनीय है कि जाटों के धरने के चलते इस ट्रैक से हिसार की तरफ आने-जाने वाली 12 पैसेंजर व तीन एक्सप्रेस ट्रेनें रद्द रहीं। कुछ ट्रेनों का रूट बदला गया। इससे रेलवे को लाखों रुपए का नुकसान हो चुका है।
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