तंगहाल था इस अभिनेता का परिवार, पहले ढाबे पर तो वकील के यहां की नौकरी / तंगहाल था इस अभिनेता का परिवार, पहले ढाबे पर तो वकील के यहां की नौकरी

तंगहाल था इस अभिनेता का परिवार, पहले ढाबे पर तो वकील के यहां की नौकरी

Balraj Singh

Jan 06, 2017, 11:06 AM IST
अंबाला सिटी रेलवे स्टेशन स्थि अंबाला सिटी रेलवे स्टेशन स्थि
अंबाला। अभिनेता ओमपुरी का कम ही सही, पर अंबाला से गहरा नाता रहा है। यह उनकी जन्मभूमि है। यहां रहने के दौरान उन्होंने पहले एक ढाबे पर नौकरी की, जहां से चोरी का इल्जाम लगाकर निकाल दिया गया। इतना ही नहीं उन्होंने एक वकील के यहां भी काम किया था। पर वहां भी ज्यादा दिन नहीं टिक सके। पिता की शराब की लत बनी परिवार के बिखरने की वजह...
- ओम पुरी का जन्म 18 अक्टूबर 1950 को हरियाणा के अंबाला में हुआ था। पिता रेलवे में नौकरी करते थे, इसके बावजूद परिवार का गुजारा बामुश्किल चल रहा था।
- ओमपुरी का परिवार जिस मकान में रहता था। उसके पास एक रेलवे यार्ड भी था। ओमपुरी को ट्रेनों से काफी लगाव था।
- रात के वक्त वह अक्सर घर से निकलकर रेलवे यार्ड में जाकर किसी भी ट्रेन में सोने चले जाते थे। यही वह वक्त था, जब ओम पुरी सोचते थे कि में बड़ा होकर एक रेलवे ड्राइवर बनूंगा।
- बताया जाता है कि आेम के पिता शराब पीने के आदी थे, जिसकी वजह से इनकी मां इन्हें लेकर पटियाला जिले में स्थित अपने मायके सन्नौर चली गई थी।
इस तरह गई दो नौकरियां तो मिल गई तीसरी
- ओमपुरी ने अपने परिवार की समस्या व जरूरतों को पूरा करने के लिए एक ढाबे पर नौकरी भी की। कुछ समय बाद ढाबे के मालिक ने उन पर चोरी का आरोप लगाते हुए नौकरी से हटा दिया।
- फिर कुछ समय बाद ओमपुरी पंजाब राज्य के पटियाला में स्थित गांव सन्नौर में अपने ननिहाल चले आए। वहां प्रारंभिक शिक्षा पूरी की।
- इसी दौरान उनका रुझान अभिनय की ओर हो गया और वे सिनेमा जगत के लिए जागरूक से होने लगे और धीरे-धीरे नाटकों में हिस्सा लेने लगे। फिर खालसा कॉलेज में दाखिला लिया।
- उसी दौरान ओमपुरी एक वकील के यहां मुंशी का काम भी करने लगे। बीते दिनों एक इंटरव्यू में ओमपुरी ने खुद खुलासा कि था कि शुरुआती दिनों में वो चंडीगढ़ में वकील के साथ मुंशी थे।
- एक बार चंडीगढ़ में उनके नाटक की परफॉर्मेंस थी, लेकिन वकील ने उन्हें तीन छुट्टी देने से मना कर दिया। इस पर ओम पुरी ने कहा- अपनी नौकरी रख ले, मेरा हिसाब कर दे।
- जब कॉलेज के लड़कों को पता चला कि मैंने नौकरी छोड़ दी तो उन्होंने प्रिंसिपल से बात की। इस पर प्रिंसिपल ने प्रोफेसर से कहा-कॉलेज में कोई जगह है क्या।
- इस पर उन्होंने कहा, है एक लैब असिस्टेंट की, लेकिन ये आज का स्टूडेंट है इसे क्या पता साइंस के बारे में। प्रिंसिपल बोले-कोई बात नहीं लड़के अपने आप कह देंगे, नीली शीश पकड़ा दे, पीली शीशी पकड़ा दे। इस नौकरी के साथ ही ओमपुरी कॉलेज में हो रहे नाटकों में भी हिस्सा लेते रहे।
रंगकर्मी हरपाल टिवाना ने बदली ओम की राह
- यहां उनकी मुलाकात हरपाल और नीना टिवाना से हुई, जिनके सहयोग से वह पंजाब कला मंच नामक नाट्य संस्था से जुड़ गए। इसी तरह ओमपुरी ने दिल्ली में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में दाखिला भी लिया। अभिनेता बनने का सपना लेकर पुणे फिल्म संस्थान में दाखिला ले लिया।
- 1976 में पुणे फिल्म संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद इसी सत्र में अपने सिनेमा करियर की शुरुआत फिल्म "घासीराम कोतवाल" से की साथ ही साथ लगभग डेढ़ वर्ष तक एक स्टूडियो में लोगों को अभिनय करने की शिक्षा भी दी।
मिले कई फिल्म अवार्ड
- गोधूलि, भूमिका, भूख, शायद, सांच को आंच नहीं जैसी अनेक फिल्मों में अभिनय किया लेकिन इससे उन्हें कोई खास फायदा नहीं मिला, पर 1980 में रिलीज फिल्म "आक्रोश" इनके सिनेमा करियर की पहली हिट फिल्म साबित हुई।
- ओमपुरी को अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किए गया। फिल्म "अर्धसत्य" एक ऐसी फिल्म थी, जो ओमपुरी के सिनेमा करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में गिनी जाती है। फिल्म में ओमपुरी ने एक पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका निभाई थी।
- हिंदी फिल्मों के अलावा ओमपुरी ने पंजाबी और दूसरी भाषाओं की फिल्मों में भी अपनी कला को दिखाया है व एक अच्छे अभिनेता के रूप में अभिनय किया है।
नव्बे के दशक में ओमपुरी ने छोटे पर्दे की ओर भी अपना रुझान दिखाया है। सिनेमा जगत में अपना एक बहुत ही अच्छा योगदान देने के कारण 1990 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
- 4 दशक लंबे सिनेमा करियर में लगभग 200 फिल्मों में अभिनय किया। ओमपुरी ने अपने जीवन मे अनेक समस्याओं का सामना करते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे पर कभी हार नहीं मानीं और अपनी मंजिल तक पहुंच ही गए।
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