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अब टैक नंबर तीन से भी दौडग़ी शताब्दी और शान-ए-पंजाब

8 वर्ष पहले
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जालंधर। खस्ताहाल हो चुके टै्रक नंबर तीन पर जल्द ही शताब्दी और शान-ए-पंजाब जैसी लंबी और तेज रफ्तार की गाडिय़ां दौड़ती नजर आएगी। फिरोजपुर मंडल के इंजीनियरिंग विभाग ने ट्रैक नंबर तीन पर दो करोड़ की लागत से वाशेबल एप्रॅन बनाए जाने प्रस्ताव बनाकर रेलवे बोर्ड को भेज दिया है। अब बस बोर्ड से इसका एपू्रवल मिलने की देर है और काम शुरू कर दिया जाएगा।

ट्रैक नंबर तीन पर वाशेबल एप्रॅन बनाए जाने का काम भी ओपन लाइन द्वारा ही किया जाएगा। अमृतसर से चलने वाली अधिकांश गाडिय़ों को ट्रैक नंबर तीन खस्ताहाल होने के चलते अभी टै्रक नंबर दो से ही गुजरती है। आलम यह हो जाता है कि कभी ट्रेनों का लोड अधिक होने के चलते आउटर भी ट्रेनों को रोकना पड़ता है।

इस समस्या को खत्म करने और ट्रैक की हालात सुधारने के लिए इंजीनियरिंग विभाग ने यह कदम उठाया है। 600 मीटर ट्रैक पर वाशेबल एप्रॅन बनाया जाएगा। साथ ही हाइड्रेंट सिस्टम को पूरी तरह से नया किया जाएगा। जिससे ट्रैक की धुलाई में कोई परेशानी न आए। मालूम हो कि हाल ही में बीते पांच साल से लटका हुआ ट्रैक नंबर पर वाशेबल एप्रॅन बनाए जाने का प्रोजेक्ट कंप्लीट हुआ। यह 575 मीटर वाशेबल एप्रॅन का यह प्रोजेक्ट 1.50 करोड़ रुपए का था।

लोड़ होगा खत्म, यात्रियों को मिलेगी राहत
ट्रैक नंबर तीन पर वाशेबल एप्रॅन बनाए जाने से जहां ट्रैक नंबर दो और एक पर गाडिय़ों का लोड खत्म होगा वहीं दूसरी तरफ यात्रियों को भी काफी राहत मिलेगी। क्योंकि सुबह और शाम में अमृतसर से चलने वाली कई ट्रेनों के आने में काफी कम समय का अंतर होता है। इसके चलते प्लेटफार्म नंबर दो पर ही यात्रियों की जबरदस्त भीड़ होती है। ट्रेन का इंतजार करने वाले यात्रियों के सामान प्लेटफार्म पर होने के चलते ट्रेन पर चढऩे वाले यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ट्रैक नंबर तीन के बनने के बाद ट्रैक तीन पर आने वाली ट्रेनों के यात्री अपना सामान प्लेटफार्म नंबर तीन पर रखेंगे। वाशेबल एप्रॅन बन जाने से ट्रैक की साफ-सफाई में भी आसानी होगी।
कुछ गाडिय़ों ही गुजरती है टै्रक नंबर तीन से
टै्रक नंबर तीन के खस्ताहाल होने के चलते इस पर कुछ ट्रेनें की गुजारी जाती है। इस पर से गुजरने वाली ट्रेनों में जम्मू अहमदाबाद एक्सप्रेस, जम्मू मेल और होशियारपुर, फिरोजपुर और नवांशहर को जाने वाली कुछ डीएमयू ट्रेनें है। अधिकारियों का कहना है कि इसकी अधिकतम स्पीड पांच किमी प्रतिघंटा है। इसके चलते इस टै्रक से शताब्दी समेत दूसरी ट्रेनों को नहीं गुजारा जाता है।
कोट्स
रेलवे बोर्ड को प्रस्ताव बनाकर कुछ दिनों पहले ही भेजा गया है। 600 मीटर के वाशेबल एप्रॅन के लिए दो करोड़ रुपए का एस्टीमेट भेजा गया है। संभावना है कि जुलाई तक प्रस्ताव को स्वीकार करके फंड रिलीज कर दिया जाएगा। फंड रिलीज होते ही टेंडर करके काम को शुरू करा दिया जाएगा।
-अशोक कुमार, सीनियर डिवीजनल इंजीनियर, फिरोजपुर मंडल