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8 वर्ष पहले
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नई दिल्‍ली। गणतंत्र दिवस पर वीरता पुरस्कार प्राप्त करके और सजे-धजे हाथियों या जीप पर सवार होकर परेड का हिस्सा बने बहादुर बच्चों को वीरता पुरस्‍कार से नवाजा जाता है। सरकार पुरस्‍कार तो देती है लेकिन कुछ दिनों के बाद ही उन बहादुरों की सुध भी नहीं ली जाती है। पहला वीरता पुरस्‍कार हासिल करने वाले शख्स हरीश मेहरा की सरकार आज उसकी सुध भी नहीं ले रही है। मेहरा का गणतंत्र दिवस से खासा लगाव है, वह आज के दिन गुजरे दौर की यादों में खो जाते हैं।

आज भले ही बहादुर बच्चों को लोग हाथों हाथ ले रहे हैं लेकिन कुछ दिनों बाद शायद इन्हें पूछने वाला कोई न रहे और ये भी हरीश मेहरा की तरह गुमनामी के अंधेरे में खो जाएं। जिस शख्स की बात हो रही है , वह है 70 साल के हरीश चंद मेहरा। चांदनी चौक में रहने वाले हरीश चंद ने 2 अक्टूबर , 1957 को पंडित नेहरू को आग की लपटों से निकाला था।
 

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