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सुप्रीम कोर्ट ने खालिस्‍तानी आतंकी भुल्‍लर की फांसी पर लगाई रोक

7 वर्ष पहले
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नई दिल्‍ली। सुप्रीम कोर्ट ने खालिस्तानी लिबरेशन फोर्स के आतंकी देविन्दर पाल सिंह भुल्लर की फांसी की सजा पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश भुल्‍लर की पत्‍नी नवनीत कौर की ओर से मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। हाल ही में दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राष्‍ट्रपति को पत्र लिखकर भुल्‍लर की सजा माफी के लिए पत्र लिखा था। भुल्लर को सितंबर 1993 में भारतीय युवा कांग्रेस के मुख्यालय पर हुए बम विस्फोट के सिलसिले में मौत की सजा सुनाई गई थी।

प्रधान न्यायाधीश पी सदाशिवम, न्यायमूर्ति आर एम लोढा, न्यायमूर्ति एच एल दत्तू और न्यायमूर्ति एस जे मुखोपाध्याय की चार सदस्यीय पीठ ने भुल्लर की मानसिक बीमारी को देखते हुए फांसी पर रोक लगाई है। पीठ ने केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने शाहदरा अस्पताल से भुल्लर की मेडिकल रिपोर्ट भी तलब की है।

भुल्लर को सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में मौत की सज़ा सुनाई थी। तब से उसकी क्षमा याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है। पिछले साल उसकी पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में 15 लोगों के मौत की सज़ा को उम्रकैद में तब्दील में तब्‍दील करने के फैसले के बाद भुल्‍लर की उम्‍मीदें बढ़ा दी थीं।

आगे पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट ने क्‍यों 15 लोगों की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्‍दील किया था